नयी दिल्ली , नवम्बर 20 -- वैश्विक संस्थाओं और विश्व व्यवस्था में विकासशील देशों की भागीदारी बढाने को लेकर चल रही मशक्कत के बीच भारत मेजबान दक्षिण अफ्रीका के साथ मिलकर इस सप्ताहांत अफ्रीकी सरजमीं पर होने वाले जी-20 देशों के नेताओं के पहले शिखर सम्मेलन में विकासशील देशों की आवाज बुलंद करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दक्षिण अफ्रीकी शहर जोहान्सबर्ग में 22 और 23 नवम्बर को होने वाले इस 20 वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार को रवाना होंगे। लगातार चौथी बार किसी विकासशील देश में हो रहे इस सम्मेलन का एजेन्डा मुख्य रूप से विकासशील देशों के इर्द गिर्द ही रहेगा। इससे पहले इंडोनेशिया, भारत और ब्राजील इस सम्मेलन की मेजबानी कर चुके हैं। अफ्रीकी संघ को भारत की अध्यक्षता में वर्ष 2023 में हुए सम्मेलन में जी-20 में शामिल किया गया था और इसे विकासशील देशों के एजेन्डे की सफलता के रूप में देखा गया था। इसके बाद अफ्रीकी सरजमीं पर पहली बार जी-20 का आयोजन हो रहा है।
विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने श्री मोदी की जी 20 सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार से शुरू हो रही तीन दिन की दक्षिण अफ्रीका यात्रा के बारे में कहा कि अफ्रीकी देश की उनकी यह चौथी आधिकारिक यात्रा है। वह सम्मेलन के मेजबान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं। श्री मोदी इससे पहले 2016 में आधिकारिक यात्रा पर दक्षिण अफ्रीका गए थे। बाद में उन्होंने 2018 और 2023 में वहां दो बार ब्रिक्स के शिखर सम्मेलनों में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में जी-20 की सफल अध्यक्षता के बाद के बाद यह सम्मेलन भारत के लिए अपनी प्राथमिकता वाले मुद्दों को आगे बढाने के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। उन्होंने कहा कि 'नई दिल्ली घोषणा पत्र' ने इस वर्ष अनेक मंत्रीस्तरीय बैठकों में जी 20 दस्तावेजों को मज़बूत आधार दिया है। भारत की विशेष प्राथमिकताओं वाले क्षेत्रों जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, महिलाओं के नेतृत्व में विकास, सतत विकास के लक्ष्यों पर तेज़ी से काम करने की कार्ययोजना और पिछले वर्ष के कार्य समूहों के कार्य को दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में मज़बूती मिली है।
जी 20 में आतंकवाद के मुद्दे को उठाए जाने से संबंधित सवाल पर श्री दलेला ने कहा कि यह भारत के लिए महत्वपूर्ण विषय है लेकिन जी 20 मुख्य रूप से आर्थिक मुद्दों और उनसे जुड़े मामलों पर चर्चा का मंच है। भारत सम्मेलन के अंत में अपनाए जाने वाले घोषणा पत्र के बारे में हो रही चर्चा में शामिल है और ऐसे सभी मुद्दों पर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि अभी घोषणा पत्र के बारे में निश्चित रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी लेकिन लेकिन भारत और 'ग्लोबल साउथ' के नज़रिए से जो भी ज़रूरी मामले हैं उन पर भारत पूरा जोर देगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित