सुकमा , नवंबर 01 -- छत्तीसगढ़ के बस्तरिया राज मोर्चा के संयोजक और पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिले के आश्रमों तथा पोटाकेबिनों में अफसरों व नेताओं की मिलीभगत से आदिवासी बच्चों के अधिकारों की खुली लूट मची हुई है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल शर्मनाक है बल्कि बस्तर की आत्मा पर कलंक के समान है।
श्री कुंजाम ने शनिवार को यहां पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि आश्रमों और पोटाकेबिनों में अधीक्षक पदों पर नियुक्तियों के लिए बड़े पैमाने पर पैसों का लेनदेन हो रहा है। आरक्षित वर्गों और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के शासनकाल में वह बदलाव तो नहीं आया जिसकी उम्मीद की गई थी, बल्कि अब बच्चों की छात्रवृत्ति और भोजन के पैसे तक हड़पे जा रहे हैं।
श्री कुंजाम ने दावा किया कि जिलेभर में अब तक लगभग 30 लाख रुपये की अवैध वसूली की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और नेताओं के गठजोड़ से यह सब संभव हो रहा है और प्रशासन इसकी जानकारी होने के बावजूद चुप है। उन्होंने चेताया, "हमने कई बार प्रमाण सौंपे, लेकिन न जांच हुई, न कार्रवाई। यदि सरकार ने सुधार नहीं किया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।"इसी बीच, बस्तरिया राज मोर्चा के पदाधिकारी राजेश नाग ने खुलासा किया कि केरलापाल छात्रावास में अधीक्षक पैसे लेकर फरार हो गया, जिससे बच्चे भूखे रह गए। शुक्रवार रात छात्रों ने स्थानीय लोगों को सूचना दी, जिसके बाद एनएच पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। हंगामे के बाद कलेक्टर और जिला शिक्षा विभाग ने हस्तक्षेप करते हुए दो शिक्षकों की अस्थायी नियुक्ति की और भोजन की व्यवस्था कराई।
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