पटना , अगस्त 14 -- ृह विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने शुक्रवार को बताया कि राज्यभर में पारंपरिक अपराधों में बड़ी संख्या में कमी आई है।सचिव श्री कुमार ने आज यहां सूचना आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में हत्या के मामलों में 10.1 प्रतिशत, डकैती में 31.32 प्रतिशत और दंगा में 18.97 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ऐसे सभी अपराधों में बड़ी संख्या में कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि धार्मिक उन्माद से जुड़े मामलों में खुफिया जानकारी एकत्र करने से लेकर सूचना संग्रह कर त्वरित कार्रवाई करने की वजह से सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं में काफी कमी आई है। 2025-26 में संप्रदायिक घटनाओं से संबंधित 263 मामले में अभियोजन की स्वीकृति दी गई और सभी जिलों को आरोप-पत्र समर्पित करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।

सचिव ने कहा कि राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों के कारण वर्तमान में सभी जिले नक्सल मुक्त हो चुके हैं।उन्होंने कहा कि कोई जिला नक्सलवाद से प्रभावित नहीं रहा, जबकि 2013 में 22 जिले नक्सल से प्रभावित हुआ करते थे। हालांकि केंद्र सरकार ने चार जिलों औरंगाबाद, गयाजी, जमुई और लखीसराय को लीगेसी एवं थ्रस्ट जिलों के तौर पर चिन्हित करके रखा है। नक्सलवाद से मुक्त हुए सभी जिलों में इसकी पुनर्रावृति नहीं हो, इसके लिए सभी विकासात्मक कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। इस वर्ष अब तक नक्सलियों के साथ मुठभेड़ की कोई घटना नहीं हुई है। अब तक 58 नक्सलियों की गिरफ्तारी की गई है।

सचिव ने कहा कि अपराधियों की गिरफ्तारी और सजा दिलाने की कार्रवाई निरंतर जारी है। इस वर्ष मई में 64 हजार 733 कांडों में सजा सुनाई गई, जिसमें 86 हजार 760 अभियुक्तों को सजा मिली। इसमें दो को मृत्युदंड, 553 को आजीवन कारावास, 297 को 10 वर्ष से अधिक की सजा तथा 794 को 10 वर्ष से कम एवं 2 वर्ष से अधिक की सजा सुनाई गई है। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष दोषियों को सजा दिलाने की दर में 25-30 फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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