पटना , मई 15 -- बिहार में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ उन्हें सजा दिलाने की प्रक्रिया में भी तेजी आई है।

एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस वर्ष जनवरी से अप्रैल तक सात हजार 624 अपराधियों को सजा दिलाई गई है। उन्होंने बताया कि इसमें 453 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा दी गई। 253 अभियुक्तों को 10 वर्ष या उससे अधिक वर्ष की सजा सुनाई गई है। पॉक्सों एवं रेप के 218 कांडों में 267 अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा दिलाई गई है।

एडीजी श्री कुमार ने कहा कि जनवरी से अप्रैल तक जिन कुछ प्रमुख अपराधों में अपराधियों को सजा दिलाई गई है, उसमें आर्म्स एक्ट के 252 मामलों में 318 अपराधी, हत्या के 213 मामलों में 508, डकैती के 17 में 34, लूट के 59 में 66, अपहरण के 51 मामलों में 62 अपराधियों को सजा दिलाई गई है। इसके अलावा सभी अपराधों में कुल सजा दिलाने वाले अपराधियों में 10 वर्ष से कम सजा पाने वाले अपराधियों की संख्या 651, 2 वर्ष से कम सजा पाने वालों की संख्या 981 और जुर्माना या बंदपत्र के आधार पर छोड़े गए अभियुक्तों की संख्या 68 हजार 284 है। फरवरी महीने में दो अपराधियों को फांसी की सजा भी दी गई है।

एडीजी (विधि-व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने बताया कि मोतिहारी, समस्तीपुर, वैशाली, सीवान और मधुबनी में एसपी (ग्रामीण) का पद सृजन किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पद इन जिलों में विधि-व्यवस्था को सुचारू तरीके से संचालित करने के उदेश्य से किया गया है। इससे कांडों का निष्पादन तेजी से होगा।

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