ग्वालियर , मार्च 9 -- मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित कर दिया है। अदालत ने यह फैसला उनके द्वारा नामांकन पत्र में आपराधिक प्रकरणों की पूरी जानकारी नहीं देने के आधार पर सुनाया।

यह फैसला भाजपा नेता रामनिवास रावत की ओर से दायर चुनाव याचिका पर दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुकेश मल्होत्रा ने अपने शपथपत्र में कई आपराधिक मामलों की जानकारी या तो गलत दी या छिपाई।

न्यायालय के आदेश में उल्लेख किया गया है कि मल्होत्रा ने अपने शपथपत्र के क्लॉज-6 में आपराधिक मामलों का पूर्ण विवरण नहीं दिया और क्लॉज-5 में भी अपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की। अदालत ने इसे मतदाताओं से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने की श्रेणी में माना, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 100(1)(b) और 123(2) के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार मल्होत्रा के खिलाफ कई आपराधिक प्रकरण दर्ज रहे हैं, जिनमें कराहल थाने में दर्ज वर्ष 2011 के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 294, 332, 252 और 186 के तहत उन्हें छह माह के कारावास और जुर्माने की सजा भी सुनाई गई थी। इसी प्रकार वन अपराध से जुड़े एक प्रकरण में वर्ष 2020 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, श्योपुर द्वारा उन्हें दोषी ठहराते हुए जुर्माना और एक माह के कारावास की सजा दी गई थी।

अदालत ने यह भी माना कि कुछ मामलों में आरोप तय होने के बावजूद शपथपत्र में यह उल्लेख किया गया कि आरोप तय नहीं हुए हैं, जबकि संबंधित न्यायालयों में आरोप पहले ही तय हो चुके थे।

निर्णय में यह भी उल्लेख किया गया कि चुनाव में मुकेश मल्होत्रा को लगभग 50.66 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे, जबकि याचिकाकर्ता रामनिवास रावत को 46.95 प्रतिशत मत मिले थे।

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन निरस्त करते हुए रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित घोषित कर दिया। इस फैसले को प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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