चेन्नई , मई 30 -- अखिल भारतीय द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (अन्नाद्रमुक) ने अपने चार बागी विधायकों के इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (टीवीके) में शामिल होने के बाद शनिवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आरवी अर्लेकर से मुलाकात कर टीवीके पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाते हुए इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है। इस संदर्भ में अन्नाद्रमुक ने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा।
राज्य विधानसभा में सरकार के लाये गये विश्वास मत के समर्थन में मतदान करने वाले 25 असंतुष्ट विधायकों में ये चार विधायक भी शामिल थे। इनके इस्तीफे के बाद उनकी चार सीटों मदुरंतकम, धारापुरम, पेरुंदुरई और अंबासमुद्रम को रिक्त घोषित कर दिया गया है।
इन चार सीटों के साथ-साथ त्रिची ईस्ट निर्वाचन क्षेत्र के लिए भी जल्द ही उपचुनाव कराये जायेंगे। त्रिची ईस्ट उन दो सीटों में से एक थी, जिसे श्री विजय ने जीता था और बाद में इसे खाली कर दिया था।
इस टूट से परेशान अन्नाद्रमुक नेतृत्व और उसके सहयोगियों ने इसे हॉर्स ट्रेडिंग का नतीजा बताया है। पार्टी के मुख्य सचेतक एवं पूर्व मंत्री एग्री एसएस कृष्णमूर्ति और राज्यसभा सांसद एम धनपाल ने राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात कर यह ज्ञापन सौंपा। यह कदम अन्नाद्रमुक के राज्यपाल को पहले सौंपे गये उस ज्ञापन के बाद उठाया गया है, जो विधानसभा में अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों के टीवीके के पक्ष में मतदान करने से संबंधित था। गौरतलब है कि चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद टीवीके के पास बहुमत नहीं था, लेकिन इस मतदान के बाद उसने पर्याप्त संख्या बल जुटा लिया था।
बैठक के बाद राजभवन के बाहर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए श्री कृष्णमूर्ति ने कहा कि पार्टी ने हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर टीवीके के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और उन परिस्थितियों की गहन जांच कराने के लिए कहा है, जिनके तहत इन चार विधायकों ने इस्तीफा दिया है।
विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर को अपना इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद मंत्रियों के कक्ष में टीवीके (तमिलगा वेत्री कझगम) में शामिल होने वाले चार बागी विधायकों का हवाला देते हुए उन्होंने टीवीके पर सत्ता के केंद्र राज्य सचिवालय को टीवीके के पार्टी कार्यालय में बदलने का आरोप लगाया।
इससे पहले 'एक्स' पर पोस्ट में श्री धनपाल ने उन घटनाक्रमों पर सवाल उठाये, जिनके कारण ये इस्तीफे हुए। उन्होंने कहा कि शपथ लेने के तुरंत बाद इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल होने वाले चारों विधायकों की पृष्ठभूमि की जांच की जानी चाहिए, विशेष रूप से ऐसी स्थिति में जहां पार्टी के पास बहुमत नहीं था।
बड़े पैमाने पर पैसों के लेन-देन की खबरें सामने आने का आरोप लगाते हुए धनपाल ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए केंद्र सरकार को सीबीआई जांच के आदेश देने चाहिए। वह यह भी चाहते थे कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस संबंध में कथित वित्तीय लेन-देन की जांच करे।
हालांकि अन्नाद्रमुक अपने पूर्व विधायकों से जुड़े इस राजनीतिक फेरबदल के बाद टीवीके पर लगातार 'हॉर्स-ट्रेडिंग' में शामिल होने का आरोप लगाती रही है, लेकिन राजस्व मंत्री केए सेंगोट्टैयन सहित टीवीके नेताओं ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है।
अपने गृह जिले इरोड में पत्रकारों से बात करते हुए, गोबीचेट्टीपालयम के इस कद्दावर नेता ने विपक्ष के लगाये गये 'हॉर्स-ट्रेडिंग' के आरोपों का कड़ा खंडन किया और ऐसे दावों के आधार पर ही सवाल उठाये।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि राजनीतिक सौदेबाजी की कोशिशें सबसे पहले किसने शुरू की थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी पलानीस्वामी थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री बनने के प्रयास में डीएमके से समर्थन हासिल करने की संभावनाओं को टटोला था, जिसके बारे में यह भी कहा गया कि यह दोनों द्रविड़ दिग्गजों का टीवीके को सरकार बनाने से रोकने का प्रयास था।
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