भिण्ड , जुलाई 15 -- मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष डॉ. कैलाश जाटव ने भिण्ड जिले के दौरे के दौरान अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित योजनाओं और प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में लापरवाही और अनावश्यक देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, डॉ. जाटव ने जिला प्रशासन, पंचायत, नगरीय निकाय तथा पुलिस अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कर आयोग में जिले से संबंधित लंबित 42 शिकायतों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए संचालित शासकीय योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान देने तथा निर्धारित 18 प्रतिशत बजट का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्वीकृत कार्यों का फोटो सहित सत्यापन कराने को भी कहा।
आयोग अध्यक्ष ने नामांतरण के मामलों का 15 दिन के भीतर निराकरण करने, अवैध रजिस्ट्रियों की जांच कराने तथा पट्टाधारकों को बिना नोटिस बेदखल नहीं करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारों का हनन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा एवं छात्रावासों की समीक्षा के दौरान उन्होंने छात्राओं की सुरक्षा, साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता तथा अन्य सुविधाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए छात्रावासों में सुरक्षा गार्ड की तैनाती, जाली लगाने, रंगाई-पुताई कराने और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित बैठक में डॉ. जाटव ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से संबंधित मामलों की समीक्षा की तथा लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण, संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई और कमजोर वर्गों को समय पर न्याय दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रखने के लिए गश्त और निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया।
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