पटना , जून 15 -- ामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय ने एक लक्ष्य के तहत सभी वर्ग के पदाधिकारियों के लिए ट्रेनिंग की शुरुआत की है, जिससे ऊपरी न्यायालयों में सरकारी सेवकों के खिलाफ प्रस्तुत आरोप पत्र त्रुटियों की वजह से खारिज नहीं हो। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने सोमवार को मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय की ओर से पटना के रेवेन्यू सर्वे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आरएसटीआई) में आयोजित बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमावली 2005 के अनुप्रयोग संबंधी प्रशिक्षण सत्र को संबोधितकरते हुए कहा कि उचित प्रशिक्षण और जानकारी के अभाव में अधिकारियों के निर्णय अक्सर न्यायालय से खारिज हो जाते हैं। इसी के साथ सरकार की छवि भी खराब होती है।
सचिव श्री सिंह ने कहा कि अनुशासनिक कार्रवाई में की गई त्रुटियों की वजह से न्यायालय से प्रकरण खारिज होने पर सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की कोशिश होनी चाहिए कि सरकारी सेवक के खिलाफ लगे आरोपों में जांच लंबी ना चले और अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया में सभी चरणों का पालन किया जाय।
इस अवसर पर प्रशिक्षक सतीश तिवारी ने उपस्थित सभी पदाधिकारियों को सरकारी सेवक के खिलाफ दर्ज प्रकरणों में वृहद दंड देने के प्रावधानों से रूबरू कराया। उन्होंने जटिल आरोप और बचाव के अभिकथन पर निष्कर्ष निकालने, निर्णय लेने की दिशा में संचालन और प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया बताई। साथ ही नियम 17 में संचालन और प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की नियुक्ति करने के प्रावधानों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि प्रकरण के संचालन के बीच में संचालन पदाधिकारी आरोपी के बचाव संबंधी किसी भी बयान पर विभागीय या अनुशासनिक प्राधिकारी का अभिमत नहीं मांगेंगे।
श्री तिवारी ने कहा कि समकक्षता हमेशा एक संवर्ग या सेवा में होती है। दूसरे सेवा या संवर्ग के पदाधिकारी के लिए यह नियम लागू नहीं होगा। उन्होंने सरकारी सेवकों के खिलाफ लगे आरोप के मामले में प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की नियुक्ति और उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की भूमिका अनुशासनिक प्राधिकारी के वकील के रूप में आरोपों को प्रस्तुत करने और उसे प्रमाणित करने का प्रयास करना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी बनाने में किसी प्रकार की बाध्यता नहीं है। सैद्धांतिक रूप से मामले के जानकार और सक्षम पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी बनाने के लिए कहा गया है।
इस अवसर पर प्रशिक्षक शालिग्राम पांडेय ने शिकायत और परिवाद के बीच के अंतर को परिभाषित करते हुए जन प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज होने वाले परिवाद की बारीकियों से रूबरू कराया। कार्यक्रम में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निदेशक सुहर्ष भगत, अपर सचिव महेंद्र पाल, मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय के संयुक्त सचिव प्रभात कुमार समेत दूसरे कई पदाधिकारियों की प्रमुख मौजूदगी रही।
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