मुंबई , जुलाई 03 -- शिवसेना (यूबीटी) के विधान परिषद सदस्य अनिल परब ने शुक्रवार को महाराष्ट्र विधान परिषद के चल रहे मानसून सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला तथा सार्वजनिक निर्माण निविदाओं में कथित अनियमितताओं, नगर निकाय के फंड के भेदभावपूर्ण वितरण और पुणे में हाल ही में हुई जहरीली शराब त्रासदी को लेकर प्रशासन को निशाने पर लिया।
श्री परब ने वर्ष 2027 के नासिक कुंभ मेले के लिए बुनियादी ढांचा कार्यों की निविदा प्रक्रिया में एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले पर चिंता जतायी। उन्होंने आरोप लगाया कि 16 ठेकेदारों के एक "गुट" के माध्यम से 2,270 करोड़ रुपये के सड़क कार्य की निविदाओं में हेरफेर किया गया था। उन्होंने मुख्य अभियंता प्रशांत अवाती और ठेकेदार विलास बिरारी पर वर्ष 2018 के सरकारी मानदंडों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर पात्र बोली दाताओं को अयोग्य ठहराया गया। उन्होंने दावा किया कि इन अनुबंधों के तहत विकसित की जा रही सड़कों पर काम पूरा होने से पहले ही दरारें आ गयी हैं। उन्होंने विशेष जांच दल से इस मामले की जांच कराने और इसमें शामिल अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग की।
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए श्री परब ने विकास निधि आवंटित करने में सरकार और नागरिक प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जहां शिवसेना (यूबीटी) के पार्षदों को विकास कार्यों के लिए महज 25 लाख रुपये दिए गए, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा और उसकी सहयोगी शिवसेना के पार्षदों को 2.5 करोड़ रुपये से लेकर 15 करोड़ रुपये तक के फंड आवंटित किए गए। उन्होंने कहा, "यह करदाताओं का पैसा है। सत्ता में बैठे लोगों की निजी संपत्ति नहीं है। आप केवल ट्रस्टी हैं, मालिक नहीं।" उन्होंने सरकार से सत्ता के दुरुपयोग को रोकने का आग्रह किया।
उन्होंने पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में हाल ही में हुई जहरीली शराब त्रासदी का भी जिक्र किया। इसमें 22 लोगों की जान चली गयी थी। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 13 कनिष्ठ आबकारी अधिकारियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को महज एक "दिखावा" है। उन्होंने तर्क दिया कि असली अपराधियों और जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों को बख्श दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया, "सरकार ने रिश्वत लेने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को बचाते हुए कनिष्ठ कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया है।" उन्होंने आबकारी विभाग के वरिष्ठ नेतृत्व के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।
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