केवड़िया , सितबंर 22 -- कभी दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक 'मालगुडी डेज़' देखकर बड़ी हुई पीढ़ी के लिए अनंत नाग केवल एक जाना-पहचाना चेहरा नहीं, बल्कि भारतीय रूपहले पर्दे की सशक्त अभिव्यक्ति रहे हैं। मंगलवार को इस गहरे जुड़ाव में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब इस दिग्गज अभिनेता को गुजरात के केवडिया स्थित एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में वर्ष 2024 के 'दादा साहेब फाल्के पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
देश का यह सर्वोच्च सिनेमा सम्मान प्राप्त करते हुए श्री नाग ने इसे "अत्यंत गौरव का क्षण" बताया और कहा कि पांच दशकों से अधिक लंबे सिनेमाई सफर के बाद यह पहचान पाकर वे स्वयं को बेहद भाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। समारोह की भव्यता से अभिभूत अभिनेता ने अपनी स्वीकारोक्ति भाषण में कहा, "आप सभी के मध्य उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत सम्मान की बात है, मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।"अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर श्री नाग ने स्पष्ट किया कि वे इसे केवल एक निजी सफलता नहीं मानते, बल्कि यह उन सभी लोगों का सम्मान है जो उनके लंबे करियर में सहयात्री रहे। उन्होंने अपने साथी कलाकारों, निर्देशकों, सहायकों और कर्मचारियों का आभार जताया, साथ ही उन करोड़ों दर्शकों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उनके निभाए किरदारों को खुले दिल से अपनाया।
कन्नड़ सहित कई भारतीय भाषा के सिनेमा में अपनी अलग छाप छोड़ने वाले श्री नाग ने इस अवसर पर थिएटर से लेकर भारतीय सिनेमा का एक प्रमुख स्तंभ बनने तक की अपनी यात्रा को याद किया। उन्होंने बताया कि सिनेमा में कदम रखने से पहले उन्होंने लगभग पांच वर्ष थिएटर में बिताए। यही साल उनकी ट्रेनिंग के थे और यहीं से अभिनय ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी।
श्री नाग को पहला बड़ा अवसर कन्नड़ सिनेमा में मिला इसलिए वह इसे अपनी कलात्मक यात्रा का केंद्र और प्रस्थान बिंदु मानते हैं। उन्होंने बाद में हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम और मराठी सिनेमा में भी खूब काम करके यश अर्जित किया, लेकिन उन्होंने हमेशा माना कि वे अन्य भाषाई इलाकों में कर्नाटक के एक सांस्कृतिक राजदूत के रूप में पहचाने गए।
श्री नाग के करियर की शुरुआत कन्नड़ फिल्म 'संकल्प' से हुई थी, जबकि श्याम बेनेगल की 'अंकुर' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में पर्दापण किया। इन वर्षों में उन्होंने समांतर सिनेमा, मुख्यधारा की फिल्मों और टेलीविजन के माध्यम से छह भारतीय भाषाओं की 300 से अधिक फिल्मों में विविध भूमिकाएं निभाईं। टीवी दर्शकों के बीच 'मालगुडी डेज़' ने उन्हें हर घर में लोकप्रिय बना दिया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित