श्रीगंगानगर , मई 04 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक जयदीप बिहानी एक बार फिर विवादों के घेरे में घिर गए हैं।

राजस्थान शहरी अवसंरचना विकास परियोजना (आरआईयूडीपी) और लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी)के अधिकारियों से मारपीट के मामले के बाद अब उन्होंने अधिवक्ताओं के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी करके बार संघ श्रीगंगानगर को भड़का दिया है। श्रीगंगानगर में बार संघ की कार्यकारिणी ने आज विधायक की टिप्पणी की तीखी निंदा की और सर्वसम्मति से उनके विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित किया। साथ ही अधिवक्ता कृष्ण अलीपुरा को जान-माल का खतरा बताते हुए पूर्ण सुरक्षा की मांग की गई है।

मामले के अनुसार 30 अप्रैल को विधायक जयदीप बिहानी के खिलाफ एसडी कॉलेज कैंपस स्थित विधायक सेवा केंद्र में शहर की पेयजल आपूर्ति समस्या पर चर्चा के लिए बुलाई बैठक में आरयूआईडीपी के सहायक अभियंता जगनलाल बैरवा, और अन्य अधिकारियों से मारपीट करने का आरोप लगाया गया था। जबकि विधायक बिहानी का आरोप है कि जगनलाल बैरवा ने उन्हें थप्पड़ मारा, जिससे उनका चश्मा टूट गया और चेहरे पर चोट आई। विधायक के निजी सचिव मनीष गर्ग की रिपोर्ट पर जवाहरनगर थाना पुलिस ने तुरंत उक्त अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करके शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया।

दूसरी ओर पीड़ित अधिकारियों ने जमानत मिलने के बाद अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मारपीट विधायक और उनके लोगों ने की थी। तीनों अधिकारियों अधिवक्ता कृष्ण अलीपुरा के साथ मीडिया के सामने आए। जगनलाल बैरवा ने अपने शरीर पर लगी चोटें दिखाईं और आंख पर लगी चोट की वजह से आंख लाल होने का दावा किया।

विगत दो मई को राज्य सरकार के निर्देश पर शहरी निकाय विभाग के शासन सचिव रवि जैन जांच के लिए श्रीगंगानगर पहुंचे। उसी दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक जयदीप बिहानी ने कहा- काले कोटवालों ने आंख को लाल-पीला किया है। इसी टिप्पणी पर अधिवक्ता वर्ग में भारी आक्रोश है।

आज बार संघ के सभागार में बार संघ के अध्यक्ष हंसराज तनेजा की अध्यक्षता में कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधायक जयदीप बिहानी द्वारा विगत दिवस पर अधिवक्ताओं के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से विधायक जयदीप बिहानी के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित किया। अध्यक्ष हंसराज तनेजा ने कहा-इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी को अधिवक्ता वर्ग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।

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