उज्जैन , जून 15 -- देश की प्राचीन धार्मिक नगरी उज्जैन में अधिक मास की सोमवती अमावस्या के अवसर पर सोमवार को लाखों श्रद्धालुओं ने मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया तथा विश्व प्रसिद्ध भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार अधिक मास के दौरान रविवार को एक ही दिन में दो लाख 47 हजार 894 श्रद्धालुओं ने भगवान महाकालेश्वर के दर्शन किए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष में आने वाले अधिक मास में भगवान शिव की पूजा, दर्शन और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। अधिक मास की अमावस्या को पुरुषोत्तम अमावस्या भी कहा जाता है। इसी कारण सोमवार तड़के से ही शिप्रा नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
रामघाट से लेकर बड़े पुल तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक दिन पहले ही उज्जैन पहुंचने लगे थे। सोमवती अमावस्या और अधिक मास की अमावस्या के विशेष संयोग के चलते इस बार श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।
महिलाओं ने शिप्रा स्नान के बाद भगवान सोमेश्वर महादेव का पूजन किया तथा पीपल और वटवृक्ष की परिक्रमा कर अखंड सौभाग्य की कामना की। परंपरा के अनुसार महिलाओं ने वटवृक्ष पर सूत का धागा लपेटकर पूजा-अर्चना भी की। श्रद्धालुओं ने स्नान के उपरांत दान-पुण्य किया और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला देर शाम तक जारी रहने की संभावना है। इसके चलते रेल और बस सेवाओं में भी विशेष भीड़ देखी गई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने महाकालेश्वर मंदिर सहित शहर के अन्य प्राचीन मंदिरों में भी दर्शन किए।
आगामी सिंहस्थ की तैयारियों के तहत पुराने शहर की आंतरिक सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य जारी है। इसके बावजूद प्रमुख बाजारों और गलियों में दिनभर श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही बनी रही।
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