कोलकाता , मई 13 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच ईंधन बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के मद्देनजर अपने आधिकारिक काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने की घोषणा की है और सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वे गैर-ज़रूरी गाड़ियों को हटा दें।

श्री अधिकारी बुधवार को भवानीपुर से विधायक के तौर पर शपथ लेने के बाद विधानसभा से बाहर आने के बाद संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने अपनी सुरक्षा टीम को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि काफिले में केवल ज़रूरी गाड़ियां ही शामिल रहें। उन्होंने कहा, "मैंने सुरक्षाकर्मियों से कहा है कि वे गैर-ज़रूरी गाड़ियों को हटा दें।"पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर श्री अधिकारी को केंद्रीय सुरक्षा कवच के साथ 'जेड-प्लस' श्रेणी की सुरक्षा मिलती है, जिसके कारण उनकी सुरक्षा व्यवस्था दोहरी होती है। इन नियमों के चलते उनके काफिले में आमतौर पर बड़ी संख्या में गाड़ियां होती हैं। उन्होंने हालांकि ईंधन बचाने के लिए प्रधानमंत्री की अपील के बाद नियमों के अनुसार अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखते हुए काफिले को तर्कसंगत बनाने का फैसला किया।

यह कदम श्री मोदी द्वारा सरकारी अधिकारियों और नागरिकों से पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न आर्थिक दबाव को देखते हुए ईंधन की खपत कम करने का आग्रह करने के कुछ ही समय बाद उठाया गया। प्रधानमंत्री ने भी इस पहल के तहत अपने काफिले में गाड़ियों की कमी करने का फैसला किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करके इसी तरह के कदम उठाए।

श्री अधिकारी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में भवानीपुर से विधायक के तौर पर शपथ ली। उनके साथ, कई मंत्रियों और नए चुने गए विधायकों ने भी शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह प्रोटेम स्पीकर तापस रॉय ने संपन्न कराया।

इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायकों को भी विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए सार्वजनिक परिवहन का विकल्प चुनकर प्रधानमंत्री की अपील का पालन करते देखा गया। शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए कई भाजपा विधायक बसों से विधानसभा पहुंचे। शीर्ष राजनीतिक नेताओं द्वारा उठाए गए ईंधन बचाने के इन कदमों को पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति से जुड़े बढ़ते आर्थिक दबाव और ऊर्जा की कीमतों तथा ईंधन की खपत पर इसके प्रभाव को लेकर जताई जा रही चिंताओं के प्रति एक प्रतीकात्मक और साथ ही प्रशासनिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित