मुंबई , जुलाई 30 -- महाराष्ट्र में कल्याण की एक अदालत ने 2009 के लोकसभा चुनावों से जुड़े मानहानि मामले में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अदालत में पेश होने का समन जारी किया है।
अदालत ने श्री ठाकरे को 5 अगस्त को पेश होने का आदेश देते हुए अन्य प्रतिवादियों के लिए सुनवाई की तारीख बाद में तय करने की बात कही।
यह कानूनी लड़ाई कल्याण निर्वाचन क्षेत्र में हुए कड़े चुनावी मुकाबले से जुड़ी है, जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के उम्मीदवार वसंत डावखरे का मुकाबला शिवसेना के आनंद परांजपे से हुआ था। शिवसेना के तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने 2009 के 22 अप्रैल को डोंबिवली में चुनाव प्रचार के दौरान श्री परांजपे के समर्थन में एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए मंच से श्री वसंत डावखरे का एक विवादास्पद वीडियो क्लिप दिखाया था।
गौरतलब है कि इस फुटेज में श्री डावखरे अपने कार्यकर्ताओं को चुनाव में जीत हासिल करने के लिए स्थानीय पुलिस और चुनाव अधिकारियों की अनदेखी करने को कह रहे हैं। इस क्लिप ने तुरंत पूरे महाराष्ट्र में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था।
श्री वसंत डावखरे ने उस फुटेज को नकारते हुए कहा था कि इसे जानबूझकर उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने और उनकी राजनीतिक स्थिति को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से 'मॉर्फ और चुनिंदा रूप से संपादित किया गया' बताया था। वहीं दूसरी ओर अविभाजित शिवसेना ने वीडियो की प्रमाणिकता पर जोर देते हुए चुनाव आयोग में कानूनी जवाबी शिकायत की धमकी दी थी। इस प्रकरण से नाराज श्री डावखरे ने सीधे आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
मूल शिकायत में श्री उद्धव ठाकरे, श्री एकनाथ शिंदे, श्री आनंद परांजपे और श्री रमाकांत देवलेकर सहित कई बड़े राजनीतिक नेताओं के नाम शामिल थे। अब जब 15 साल बाद यह मामला फिर से चर्चा में आया है, तो एक जटिल कानूनी स्थिति पैदा हो गई है।
गौरतलब है कि मूल शिकायतकर्ता राकांपा के वरिष्ठ नेता वसंत डावखरे अब इस दुनिया में नहीं हैं।
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