चेन्नई , सितंबर 01 -- मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) की उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत पार्टी के छह विधायकों के इस्तीफे मंजूर किए गए थे।

मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पहली पीठ ने अध्यक्ष द्वारा इस्तीफे मंजूर करने के फैसले के खिलाफ अन्नाद्रमुक सचेतक एग्री एसएस कृष्णमूर्ति और विधानसभा सचिव एवं विधायकों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। चुनाव नतीजों की घोषणा के तुरंत बाद 25 बागी विधायकों में से चार विधायकों (अंबासमुद्रम, पेरुंदुरई, मदुरंतकम और धारापुरम से चुने गए) ने तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार के विश्वास मत के पक्ष में मतदान दिया था।

गौरतलब है कि टीवीके ने 108 सीटें जीती थीं और बहुमत से पीछे रह गई थी। बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया और टीवीके में शामिल हो गए। इसके बाद दो और विधायकों ने भी ऐसा ही किया और उनके इस्तीफे भी मंजूर कर लिए गए और उनकी सूचना जारी कर दी गई, जिससे उपचुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया।

जहां चार विधायकों पर अयोग्यता की कार्रवाई शुरू हुई, वहीं श्री विरलिमलाई और श्री करूर के विधायकों पर ऐसी कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि अन्नाद्रमुक ने लिखित माफी मांगने के बाद 25 बागियों में से 21 को माफ कर दिया था। लेकिन अन्नाद्रमुक ने उनके पार्टी छोड़ने और टीवीके में शामिल होने के बाद उन्हें भी मामले में शामिल करते हुए याचिकाएं दायर कीं, जिससे कुल संख्या छह हो गई और सदन में पार्टी की संख्या 47 से घटकर 41 रह गई।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित