जयपुर , मई 12 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने अदालती कार्यवाही मोबाइल फोन से रिकॉर्ड करने के मामले को गंभीर मानते हुए सख्त रुख अपनाया है।
अदालत ने याचिकाकर्ता और उसके चालक के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने और पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिये हैं।
न्यायमूर्ति अनूप ढंढ ने मामले की सुनवाई के दौरान एक व्यक्ति को मोबाइल फोन से न्यायालय की कार्यवाही रिकॉर्ड करते हुए देखा। पकड़े जाने पर उसने रिकॉर्डिंग डिलीट करने का प्रयास किया। पूछताछ में उसने अपना नाम बारां निवासी अनिल सुमन बताया और कहा कि वह याचिकाकर्ता कमल राठौड़ का चालक है। अदालत ने कहा कि बिना अनुमति न्यायालय की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग करना न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप है और यह प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना का मामला बनता है। न्यायालय ने राजस्थान उच्च न्यायालय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2020 का हवाला देते हुए कहा कि अदालत की अनधिकृत रिकॉर्डिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
उच्च न्यायालय ने कमल राठौड़ और अनिल सुमन को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है। साथ ही रजिस्ट्रार (न्यायिक) को संबंधित पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने, मोबाइल फोन जब्त करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित