अजमेर , जून 29 -- राजस्थान में अजमेर में अति सुरक्षित समझी जाने वाली अजमेर जेल में बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की गला घोंट कर हत्या कर दी गयी।

जेल के बैरक में उसके साथ ही बंद अन्य कैदी विष्णु गुर्जर ने गमछे से गला घोट कर उसे मौत के घाट उतार दिया। मामले की सूचना मिलते ही जेल और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जेल अधीक्षक और अतिरिक्त कलेक्टर मौके पर पहुंचे।

अति सुरक्षित इस जेल में इस तरह के मामले ने कई गंभीर सवालों को पैदा कर दिया है, लेकिन पुलिस का दावा है कि यह मामला किसी तरह का गिरोह संघर्ष का नहीं है । जबकि इस पूर्व भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं ।

श्री अग्रवाल ने बताया कि यह घटना आज दोपहर हुई। फिलहाल जगन का शव शवगृह में भिजवा दिया गया है। जहां परिजनों के आने पर पोस्टमार्टम किया जायेगा। उसके बाद शव उनको सोंप दिया जायेगा। पुलिस और जिला प्रशासन ने मामले कि सूचना जगन के परिजनों को भी दे दी है।

जेल अधीक्षक पारसमल ने बताया कि पूर्वाह्न् 11 बजे से दोपहर दो बजे तक दोनों साथ थे। उसके बाद क्या हुआ पता नहीं चल सका। श्री पारसमल के मुताबिक जगन गुर्जर और विष्णु एक साथ ही रहते थे और सुबह भी दोनों ने एक साथ बैरक में साफ सफाई का काम भी किया। अपराह्न तीन बजे जब हाजिरी ली गयी तब जगन का शव एक कोने में पाया गया । जेल सूत्रों की माने तो घटना को गिरोहों के आपसी संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है।

यह भी माना जा रहा है कि विष्णु को किसी ने जगन के नाम सुपारी भी दी हो सकती है। हालांकि आधिकारिक रूप से फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। पुलिस हर पहलू से इस पूरे मामले की गहनता से जांच में जुटी हुई है।

उल्लेखनीय है कि जगन गुर्जर चंबल के बीहड़ों में दशकों तक आतंक का पर्याय रहा। डकैत जगन गुर्जर धौलपुर एव उसकी हत्या का आरोपी विष्णु भरतपुर के अजान गांव के रहने वालाे हैं। विष्णु भरतपुर के बहुचर्चित कुलदीप हत्याकांड में सजा काट रहा था।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डकैत जगन गुर्जर पर हत्या, अपहरण, फिरौती, डकैती और लूट जैसी गंभीर वारदातों के 123 से अधिक संगीन मामले दर्ज थे। तीन राज्यों की पुलिस वर्षों तक उसकी तलाश करती रही। जगन का नाम राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में खौफ के साथ लिया जाता था।

मूल रूप से राजस्थान के धौलपुर जिले के बसई डांग क्षेत्र के भूतिपुरा गांव का रहने वाला जगन एक साधारण परिवार से था। शुरुआती दिनों में वह दूध बेचने का काम करता था, जबकि उसके पिता स्थानीय मंदिर में पूजा-पाठ करते थे। समय के साथ वह अपराध की दुनिया में उतर गया।

बाद में पुलिस के दबाव में जगन गुर्जर ने 31 जनवरी 2009 को कैमरी गांव में राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। वर्ष 2022 में बाड़ी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक गिर्राज मलिंगा को धमकी देने के बाद जगन गुर्जर फिर से सुर्खियों में आ गया। पुलिस ने जगन पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। पुलिस के दबाव को देखते हुए जगन गुर्जर ने सात फरवरी 2022 को करौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया थाजगन की हत्या का आरोपी विष्णु पहले भरतपुर और उसके आसपास के क्षेत्र में मोटर साइकिलों की चोरी करता था। वह कृपाल के भतीजे पंकज के संपर्क में आने के बाद अपराध की दुनिया में उतरता चला गया। जगन की हत्या के आरोपी विष्णु ने ही कुलदीप को पहली गोली मारी थी।

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