बेंगलुरु , अगस्त 02 -- दक्षिण-पश्चिम मानसून के जोर पकड़ने और जलाशयों में तेजी से बढ़े जलस्तर के बीच कर्नाटक ने शनिवार को कावेरी का लगभग 25,000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी तमिलनाडु की ओर छोड़ा।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ दिन पहले ही राज्य ने कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के जल छोड़ने के निर्देश का विरोध किया था। केरल के वायनाड और कावेरी के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश से काबिनी जलाशय में जल आवक तेजी से बढ़ी है। इसके कारण जलाशय लगभग भर जाने पर अधिकारियों को अतिरिक्त पानी छोड़ना पड़ा।

इस बदले घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने रविवार को बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में अंतरराज्यीय कावेरी जल विवाद पर राज्य की आगे की रणनीति पर चर्चा करने का निर्णय लिया है। कर्नाटक ने पहले सीडब्ल्यूआरसी के 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश का यह कहते हुए विरोध किया था कि कम वर्षा और जलाशयों में घटते जलस्तर से पेयजल एवं सिंचाई की जरूरतें प्रभावित होंगी। इस मुद्दे पर किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों ने व्यापक विरोध-प्रदर्शन भी किये थे।

पिछले कुछ दिनों में भारी वर्षा के कारण काबिनी जलाशय में जल आवक बढ़ने से पानी छोड़े जाने की मात्रा चरणबद्ध तरीके से लगभग 5,000 क्यूसेक से बढ़ाकर 25,000 क्यूसेक कर दी गयी।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मैसूर जिले का काबिनी जलाशय 2,280.08 फुट तक भर गया है, जबकि इसकी पूर्ण क्षमता 2,284 फुट है। इसे देखते हुए प्रशासन ने काबिनी और कावेरी नदी के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ की चेतावनी जारी करते हुए निचले इलाकों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

कावेरी बेसिन के अन्य जलाशयों में भी जल स्तर बढ़ा है। कोडागु जिले का हरंगी जलाशय 2,857.30 फुट तक पहुंच गया है, जबकि इसकी पूर्ण क्षमता 2,859 फुट है। कृष्णराज सागर (केआरएस) जलाशय में भी जल आवक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गयी है।

तमिलनाडु की ओर प्रवाहित होने वाले पानी की मात्रा की निगरानी कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर स्थित बिलिगुंडलु गेजिंग स्टेशन पर की जा रही है। श्री शिवकुमार ने कहा कि जलाशय भर जाने के बाद अतिरिक्त पानी रोककर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा, " जब काबिनी जलाशय भर जाता है तो पानी छोड़ना ही पड़ता है। इसे रोका नहीं जा सकता। "उन्होंने कहा कि जलाशयों में जल आवक पर प्रति घंटे निगरानी रखी जा रही है और अंततः जलाशयों का संचालन प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। उन्होंने जल छोड़ने का विरोध कर रहे संगठनों से भी आंदोलन पर पुनर्विचार करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में संशोधित जल उपलब्धता की समीक्षा की जाएगी, साथ ही यह भी दोहराया जाएगा कि राज्य के लिए पेयजल और सिंचाई की आवश्यकताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।

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