भिण्ड , अगस्त 30 -- मध्यप्रदेश में भिण्ड जिले के अटेर में चंबल नदी पर बने पुल से मध्य प्रदेश-उत्तरप्रदेश की सीमा पार करने के लिए आज भी आमजन लोहे की सीढ़ी का सहारा लेने को मजबूर हैं। पुल के अधूरे निर्माण के कारण ग्रामीणों को पैदल आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार चंबल पुल का निर्माण वर्ष 2016 में शुरू हुआ था और करीब आठ वर्ष में यह पूरा हुआ। वर्ष 2022 की बाढ़ के बाद पुल की लंबाई करीब 300 मीटर बढ़ाने के लिए 43.46 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी किया गया था।

मध्यप्रदेश की ओर करीब 50 मीटर हिस्से के निर्माण के लिए एप्रोच रोड खोदी गई है। इसके चलते ग्रामीणों को लोहे की सीढ़ी के सहारे चढ़कर पैदल जैतपुर, आगरा की ओर जाना पड़ रहा है। वहीं उत्तरप्रदेश की ओर करीब 250 मीटर हिस्से का निर्माण भी अटका हुआ है।

बताया गया है कि उत्तरप्रदेश की ओर राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के इको-सेंसिटिव जोन में निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति नहीं मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो सका है। इससे पुल का विस्तार कार्य प्रभावित हो रहा है।

सेतु निर्माण संभाग ग्वालियर के कार्यपालन यंत्री जोगिन्दर सिंह ने बताया कि उत्तरप्रदेश की ओर से अनुमति नहीं मिलने के कारण फिलहाल वहां निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इस संबंध में भिण्ड कलेक्टर के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की सीमा में करीब 20 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उत्तरप्रदेश की अनुमति मिलने के बाद शेष कार्य को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

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