चंडीगढ़ , अक्टूबर 23 -- पंजाब के अबोहर में सफाई कर्मचारी समुदाय से संबंधित अजय कुमार की गोली मारकर हत्या के मामले में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने शुक्रवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया।

आयोग ने अधिकारियों से पीड़ित परिवार को कानून के अनुसार न्याय सुनिश्चित करने और मामले में की गई कार्रवाई कीरिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग की ओर से भेजे गए पत्र के अनुसार, 27 सितंबर को अबोहर के संत नगर में भगवान वाल्मीकि मंदिर के बाहर गोलीबारी की घटना हुई थी, जिसमें अजय कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उपचार के दौरान 19 अक्तूबर को उनकी मौत हो गई। अजय वाल्मीकि/ सफाई कर्मचारी समुदाय से संबंधित थे और उनके पिता भी सफाई कर्मचारी हैं।

आयोग ने कहा कि मीडिया में आई खबरों के अनुसार, मृतक के परिवार ने जांच की प्रगति पर गंभीर चिंता जताई है औरघटना में कथित रूप से शामिल सभी लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। आयोग ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए ऐसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जांच की समीक्षा कराने की सिफारिश की है, जो पहले से इस जांच से जुड़ा न हो। साथ ही, मृतक के मृत्यु से पहले दर्ज बयान, संभावित मृत्यु पूर्व बयान, सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और अन्य प्रासंगिक सामग्री की जांच करने को कहा है।

आयोग ने साक्ष्यों के आधार पर अपराध में शामिल पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और फरार आरोपियों का पता लगाकर उनकी गिरफ्तारी के लिए कानून के अनुसार कदम उठाने की भी सिफारिश की है। पत्र में पीड़ित परिवार और गवाहों की सुरक्षा के लिए तत्काल खतरे का आकलन करने तथा खतरा पाए जाने पर लागू कानून और गवाह संरक्षण योजना, 2018 के तहत उचित सुरक्षा उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

इसके अलावा, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा जांच की नियमित निगरानी करने और इसे बिना किसी अनुचित दबाव या हस्तक्षेप के समयबद्ध ढंग से पूरा करने पर जोर दिया गया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से परिवार को पीड़ित मुआवजा योजना और सरकारी प्रावधानों के तहत उपलब्ध आर्थिक सहायता, कानूनी मदद तथा अन्य राहत की पात्रता पर विचार करने को भी कहा है।

अधिकारियों से मामले में उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को सौंपने का अनुरोध किया गया है।पत्र में उच्चतम न्यायालय के महेंद्र चावला एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले (2019) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि न्यायालय ने गवाह संरक्षण योजना, 2018 को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत खतरे का आकलन कर गवाहों और उनके परिजनों को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसकी सिफारिशें किसी व्यक्ति के दोषी या निर्दोष होने पर पूर्व निर्णय नहीं हैं। किसी भी व्यक्ति का अपराध अदालत में कानून के अनुसार तय किया जाएगा।

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