लखनऊ , जुलाई 4 -- उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े चढ़ावे, दान, भूमि खरीद, निर्माण कार्यों तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र, वैज्ञानिक और बहु-एजेंसी फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है।

श्री राय ने अपने पत्र में कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसके निर्माण में देश-विदेश के भक्तों के दान का योगदान रहा है। ऐसे में मंदिर से जुड़े प्रत्येक आर्थिक लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि मंदिर में प्राप्त नकद चढ़ावे और श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई बहुमूल्य वस्तुओं में अनियमितताओं के मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की अंतरिम जांच के बाद एफआईआर दर्ज हुई और कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हुई है।

उन्होंने कहा है कि जांच के दौरान सीमित सीसीटीवी रिकॉर्ड और पुराने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के उपलब्ध न होने से जांच प्रभावित हुई, जो स्वयं गंभीर चिंता का विषय है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में वर्ष 2021 में मंदिर एवं आसपास के विकास कार्यों के लिए भूमि खरीद में कथित मूल्य वृद्धि और अनियमितताओं के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों में कम समय के भीतर भूमि के अत्यधिक बढ़े मूल्य पर ट्रस्ट को बेचे जाने तथा निर्माण कार्यों में कथित कमीशनखोरी के आरोप लगाए गए थे, जिनकी भी समग्र जांच आवश्यक है।

उन्होंने मांग की कि मंदिर की स्थापना से अब तक प्राप्त समस्त नकद चढ़ावे, डिजिटल दान, स्वर्ण, रजत एवं अन्य बहुमूल्य दान का स्वतंत्र ऑडिट और भौतिक सत्यापन कराया जाए।

श्री राय ने कहा है कि दान से बैंक जमा तक पूरे धन प्रवाह, बैंक खातों, लेखा पुस्तकों, ऑडिट रिपोर्ट, स्टॉक रजिस्टर, डिजिटल अभिलेख, निविदाओं, अनुबंधों, उप-ठेकों, निर्माण सामग्री खरीद, परिवहन रिकॉर्ड तथा भूमि खरीद-बिक्री से जुड़े सभी दस्तावेजों का फोरेंसिक विश्लेषण कराया जाए। उन्होंने कहा है कि यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग या अपराध से अर्जित धन के संकेत मिलते हैं तो संबंधित एजेंसियां विधि के अनुसार कार्रवाई करें।

उन्होने यह भी सवाल उठाया कि यदि कथित अनियमितताएं लंबे समय तक होती रहीं तो आंतरिक नियंत्रण, लेखा परीक्षण और प्रशासनिक निगरानी क्यों विफल रही तथा राज्य सरकार के नामित अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, सार्वजनिक धन की पवित्रता और शासन की विश्वसनीयता का विषय है।

उन्होंने मांग की कि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र, समयबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से कराई जाए तथा उसकी प्रगति और निष्कर्ष यथासंभव सार्वजनिक किए जाएं।

श्री राय ने साथ ही चेतावनी दी कि यदि व्यापक एवं स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई तो जनता के बीच प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दिए जाने का संदेह उत्पन्न होगा, जिससे शासन की निष्पक्षता और श्रद्धालुओं के विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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