अजमेर , अक्टूबर 15 -- राजस्थान के अजमेर में विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 815 वें सालाना उर्स का झंडा आगामी पांच दिसंबर को दरगाह के बुलंद दरवाजे पर चढ़ेगा जबकि रजब माह का चांद दिखाई देने पर आगामी नौ दिसंबर से उर्स की विधिवत शुरुआत होगी।

अजमेर दरगाह शरीफ के अनुसार स्थानीय खादिमों ने अपने महमानों को 'उर्स का दावतनामा' भेजना शुरू कर दिया है। गरीब नवाज के सालाना उर्स का झंडा भीलवाड़ा का गौरी परिवार दरगाह शरीफ के बुलंद दरवाजे पर पांच दिसंबर को परम्परागत तरीकें से शानो-शौकत के साथ चढ़ायेगा। उसके बाद उर्स की शुरुआत नौ दिसंबर से रजब के चांद दिखने पर होगी। इसी दिन से आस्ताने में खिदमत का समय बदल जायेगा। तड़के जन्नती दरवाजा खुलेगा, जो उर्स के छह दिनों तक आम अकीदतमंदों के लिए खुला रहेगा।

दौरान-ए-उर्स 16 दिसंबर को छठी पर छोटे कुल की रस्म और 19 दिसंबर को नवीं का बड़ा कुल की धार्मिक रस्म होगी। इसी के साथ उर्स भी सम्पन्न हो जायेगा।

उर्स के कार्यक्रम को देखते हुए अजमेर जिला प्रशासन ने तीन नवंबर को तैयारियों के लिए प्रशासनिक बैठक बुलाई है। जिसमें दरगाह कमेटी और दोनों अन्जुमन के नुमाइंदे हिस्सा लेंगे। बैठक में मेला क्षेत्र, कायड़ विश्राम स्थली पर व्यवस्था के साथ ही वीवीआईपी की चादरों पर भी विचार होगा।

उल्लेखनीय है कि ख्वाजा साहब के सालाना उर्स में हर साल लाखों अकीदतमंदों का अजमेर शरीफ में पड़ाव रहता है।

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