जयपुर , अक्टूबर 07 -- राजस्थान में अजमेर के महिला बंदी सुधार गृह से दो महिला बंदियों को अवैध तरीके से बाहर निकालकर अपने निजी आवास पर ले जाने के मामले में तत्कालीन जेलर (कारापाल) दिव्या चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया हैं।

अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के अनुसार अजमेर की सिविल लाइंस थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार चल रही निलंबित जेलर दिव्या चौधरी को मंगलवार को कोटा से गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि जेलर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जेल के सुरक्षाकर्मियों को डरा-धमकाकर आजीवन कारावास से दंडित एक सजायाफ्ता और एक विचाराधीन महिला बंदी को जबरन जेल से बाहर निकाला।

पुलिस अनुसंधान एवं तकनीकी साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ है कि गत 12 जुलाई को तत्कालीन प्रभारी जेलर दिव्या चौधरी निवासी भीलवाड़ा ने अपनी सहयोगी महिला प्रहरी सोनिया चौधरी के साथ मिलकर साजिश रची। उन्होंने महिला बंदी सुधार गृह के मुख्य द्वार पर तैनात अन्य जेल कर्मियों के विरोध के बावजूद उन्हें डराया-धमकाया और आजीवन कारावास की सजा काट रही महिला बंदी किरण उर्फ सेठा तथा विचाराधीन बंदी सना को अवैध रूप से बाहर निकाल लिया। इसके बाद जेलर दिव्या चौधरी दोनों बंदियों को अपने व्यक्तिगत स्वार्थ और निजी हित के लिए एआरजी सिटी स्थित अपने निजी आवास पर ले गई।

घटना के संबंध में पांच अगस्त को अजमेर केंद्रीय कारागृह के प्रहरी महिपाल मांगलोदा की रिपोर्ट पर सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया था। मुकदमा दर्ज होने और जुर्म प्रमाणित पाए जाने के बाद आरोपी दिव्या गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने मुख्यालय से बिना बताये फरार हो गयी थी। इसके बाद अजमेर पुलिस की विशेष टीम ने कोटा जिले के एक आवासीय फ्लैट में दबिश देकर आरोपी दिव्या को गिरफ्तार किया गया।

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