हल्द्वानी , अगस्त 16 -- उत्तराखंड के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

श्री जोशी ने रविवार को हल्द्वानी में कुमाऊं मंडल के उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) के नवनिर्मित कार्यालय भवन का उद्घाटन के अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उपनल के जरिए प्रदेश के युवाओं, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। विदेशों में जनशक्ति की बढ़ती मांग को देखते हुए संबंधित पक्षों से बातचीत चल रही है और उम्मीद है कि आगामी एक महीने के भीतर विदेश सेवा से जुड़ी प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। इस योजना के तहत लगभग 50 प्रतिशत अग्निवीरों को भी उपनल के जरिए विदेश में नौकरी से जोड़ने की तैयारी है।

श्री जोशी ने कहा कि लगभग 1.50 करोड़ रुपये की लागत से बना यह नया भवन क्षेत्र के पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और उपनल से जुड़े कार्मिकों को बेहतर और सुविधायुक्त सेवाएं प्रदान करेगा। हल्द्वानी में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और उनके परिवार रहते हैं, जिसके चलते एक आधुनिक उपनल कार्यालय की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

राज्य सरकार द्वारा सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि उपनल कर्मचारियों का दुर्घटना बीमा कवर पंजाब नेशनल बैंक के साथ समझौता कर 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा सीमा पर तैनात सेना और पैरामिलिट्री के जवानों के बलिदान की स्थिति में मिलने वाली सहायता राशि को भी 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं शहीदों के परिजनों की इच्छा के अनुरूप सड़कों, विद्यालयों और अन्य संस्थानों का नामकरण शहीदों के नाम पर करने की दिशा में कार्य जारी है।

श्री जोशी ने आगे बताया कि शहीदों के सम्मान में सैन्य धाम का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिसमें राज्य के 1,734 शहीद परिवारों के आंगन की मिट्टी और 28 नदियों का जल लाया गया है। इसे जल्द ही वीर माताओं, वीर नारियों और प्रदेश की जनता को समर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही पूर्व सैनिकों की सुविधा के लिए यह निर्णय भी लिया गया है कि उन्हें सचिवालय में अपने कार्यों के लिए अलग से पास बनवाने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि उनका पूर्व सैनिक पहचान-पत्र ही प्रवेश के लिए पर्याप्त रहेगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित