पौड़ी /नयी दिल्ली , जून 04 -- कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अग्निपथ योजना को सैनिकों के साथ विश्वासघात करार देते हुए कहा है कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर इस योजना को समाप्त किया जाएगा।
श्री गांधी ने उत्तराखंड के पौड़ी में पूर्व सैनिकों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए गुरुवार को कहा कि उत्तराखंड का देश की सशस्त्र सेनाओं में ऐतिहासिक योगदान रहा है और राज्य के सैनिकों ने युद्धों, सीमावर्ती संघर्षों तथा विभिन्न सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
खराब मौसम के कारण पौड़ी में आयोजित पूर्व सैनिकों की सभा में नहीं पहुंच पाने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए श्री गांधी ने कहा कि प्रतिकूल मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर कई प्रयासों के बावजूद आगे नहीं बढ़ सका इसलिए उन्हें मजबूरी में वापस लौटना पड़ा।
श्री गांधी ने कहा "सेना में सेवा देशभक्ति, त्याग और सैनिकों तथा सरकार के बीच एक 'अलिखित अनुबंध' पर आधारित होती है। सैनिक अपना जीवन देश, संविधान और सीमाओं की रक्षा के लिए समर्पित करते हैं, जबकि सरकार की जिम्मेदारी उनके तथा उनके परिवारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि अग्निवीर योजना के माध्यम से सरकार ने इस विश्वास को तोड़ा है। कांग्रेस का मानना है कि सेना में भर्ती होकर राष्ट्र सेवा का सपना देखने वाले युवाओं को सुरक्षा, सम्मान और सुनिश्चित भविष्य मिलना चाहिए। उनके परिवारों की भी पूरी सुरक्षा होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस सत्ता में आने पर अग्निपथ योजना को समाप्त करेगी।"कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह योजना सैनिकों के कल्याण और पेंशन पर होने वाले खर्च को कम करने के उद्देश्य से लाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों को कमजोर कर रही है और रक्षा खरीद में कुछ चुनिंदा औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। इस दौरान पूर्व सैनिकों ने दिव्यांगता पेंशन से जुड़ी कर छूट सहित कई लाभों में कटौती को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) के क्रियान्वयन को भी त्रुटिपूर्ण और असंतोषजनक बनाया गया है।
श्री गांधी ने भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते की भी आलोचना की और कहा कि इससे देश के कई रणनीतिक हित प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर हुई है और इससे देश की तेल और गैस खरीदने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। उनका यह भी कहना था कि कृषि क्षेत्र को लेकर भी यह समझौता गलत है क्योंकि अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने से छोटे और सीमांत किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनके अनुसार, भारतीय किसान बड़े अमेरिकी कृषि उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे, जिससे ग्रामीण आजीविका और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
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