वाराणसी , दिसंबर 4 -- मार्गशीर्ष (अगहन) मास की पूर्णिमा का पावन पर्व गुरुवार को धूमधाम से मनाया जा रहा है। धार्मिक नगरी काशी में इस अवसर पर अंतरगृही यात्रा के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिकर्णिका घाट से संकल्प लेकर नाव और पैदल रास्ते से अस्सी घाट पहुंचे।
वहां से ये श्रद्धालु जगन्नाथ मंदिर, पुष्कर तालाब, रामानुज कोट, संकट मोचन, साकेत नगर, बजरडीहा, मड़ुआडीह, कैंट, नदेसर, चौकाघाट, शैलपुत्री, आदिकेशव घाट होते हुए पुनः मणिकर्णिका घाट लौटकर संकल्प मुक्त करते हैं और बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के साथ अपनी यात्रा पूर्ण करते हैं।
"हर-हर महादेव, शंभू काशी विश्वनाथ गंगे" का जयघोष करते हुए अंतरगृही यात्रा निकल रही है। सिर पर बोरा, हाथ में झोला लिए सैकड़ों श्रद्धालु नंगे पांव काशी की यह परिक्रमा कर रहे हैं। अंतरगृही यात्रा के संयोजक उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि काशी में मुख्य रूप से दो प्रकार की परिक्रमा प्रचलित हैं। पहली पंचकोशी यात्रा जो पांच दिनों में काशी के बाहर-बाहर पूरी की जाती है और दूसरी अंतरगृही यात्रा जो शहर के भीतर ही संपन्न होती है।
समाजसेवी रामयश मिश्र ने कहा कि अंतरगृही यात्रा में शामिल लोगों को देखकर लगता है कि सनातन परंपरा की जड़े कितनी मजबूत है। इनमें अधिकांश लोग उच्च शिक्षित नहीं हैं, गांव देहात और काशी के ग्रामीण अंचलों से आए हैं, लेकिन उनके मन में सनातन संस्कृति के प्रति अपार श्रद्धा और निष्ठा भरी हुई है।
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