आणंद , जुलाई 14 -- केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा है कि 1970 के दशक के बाद पहली बार 'श्वेत क्रांति 2.0' की सशक्त पहल की गई है, जिसके अंतर्गत अगले पांच वर्षों में दुग्ध संग्रह में 50 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।
श्री मोहोल मंगलवार को सहकारिता क्षेत्र के पहले राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के रूप में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अमूल सहकारिता की शक्ति और महिला सशक्तिकरण का सर्वोत्तम उदाहरण है। आज अमूल से 36 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं और वित्त वर्ष 2025-26 में इसका कुल कारोबार एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
श्री मोहोल ने कहा कि आज देश में 8 लाख 50 हजार से अधिक सहकारी समितियां हैं, जिनसे 32 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। इसका आशय यह है कि देश की लगभग आधी आबादी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी है। सहकारिता डेयरी, बैंकिंग, कृषि, मत्स्य पालन और अन्य क्षेत्रों में किसानों, महिलाओं, कारीगरों तथा ग्रामीण उद्यमियों को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बनी है।
आने वाले पांच सालों में देशभर में दो लाख बहुद्देशीय प्राथमिक समितियों को बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से 35 हजार से अधिक समितियां गठित होकर कार्य करना शुरू कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को 'बीज से बाजार तक' की संपूर्ण व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की स्थापना की गई है।
श्री मोहोल ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम ने वर्ष 1963 में स्थापना से लेकर 2014 तक सहकारी क्षेत्र को लगभग 55 हजार करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 से 2025 के बीच केवल 11 वर्षों में लगभग साढ़े चार लाख करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे सहकारी संस्थाओं के विस्तार, आधुनिकीकरण और आर्थिक सुदृढ़ीकरण को अभूतपूर्व गति मिली।
इसके अलावा 'चालक ही मालिक' की अवधारणा पर आधारित भारत टैक्सी ने सहकारी अर्थव्यवस्था का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। यह पहल साझा मंच आधारित अर्थव्यवस्था में सेवा प्रदाता को केवल श्रमिक न मानकर संस्था का भागीदार और स्वामी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अगले दो वर्षों में देश के लगभग 500 शहरों में इस सहकार टैक्सी के विस्तार की योजना है।
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि वर्ष 2002 के बाद देश में पहली बार बनाई गई राष्ट्रीय सहकारिता नीति का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी, उत्तरदायी और सक्षम बनाना है। सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता और सुशासन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए अनेक संस्थागत सुधार किए गए हैं। स्वतंत्र एवं समयबद्ध चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सहकारी चुनाव प्राधिकरण की स्थापना की गई है, वहीं सदस्यों की शिकायतों के प्रभावी और निष्पक्ष समाधान के लिए सहकारी लोकपाल की व्यवस्था की गई है।
श्री मोहोल ने कहा कि सहकारी चीनी मिलों में अब केवल चीनी उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय इथेनॉल, जैव गैस और जैविक खाद तक की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती, बीज उत्पादन, पर्यटन, भंडारण, बीमा, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल सेवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित प्रबंधकों तथा कुशल मानव संसाधन की मांग तेजी से बढ़ रही है। प्राथमिक सहकारी समितियों से लेकर शीर्ष सहकारी संस्थाओं तक नियुक्तियां अब योग्यता और पेशेवर मानकों के आधार पर की जा रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल मंच और नवाचार का उपयोग करके सहकारी संस्थाओं एवं कृषि व्यवसायों को अधिक सक्षम, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाएं।
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