कोलकाता , फरवरी 17 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' में भारत चुनाव आयोग पर 'दोहरे मापदंड' अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनाव आयोग 'कब्जा आयोग' के रूप में काम कर रहा है और संकल्प लिया कि उनकी सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेगी।
उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि बिहार में स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों को बंगाल में क्यों खारिज किया जा रहा है? राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में संवाददाता सम्मेलन में सुश्री बनर्जी ने पूछा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जो दस्तावेज वैध माने गये, उन्हें पश्चिम बंगाल में अस्वीकार क्यों किया जा रहा है?उन्होंने पूछा, "बिहार के लिए एक नियम और बंगाल के लिए दूसरा नियम क्यों है? अगर बिहार में 'फैमिली रजिस्टर' को वैध माना जाता है, तो उन्हें यहां क्यों स्वीकार नहीं किया जा रहा है?" उन्होंने आयोग पर बिना किसी समान मानदंड के काम करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने एक बार फिर चुनाव आयोग को 'तुगलकी आयोग' करार दिया और आरोप लगाया कि यह भारत के उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना कर रहा है।
आलोचना को और धार देते हुए उन्होंने चुनाव आयोग को 'कब्जा आयोग' भी बताया और दावा किया कि यह भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है।
सुश्री बनर्जी ने कहा कि उन्होंने पहले पड़ोसी देश बंगलादेश की चुनावी प्रक्रिया के बारे में चिंता व्यक्त की थी, लेकिन गौर किया कि वहां चुनाव सुचारू रूप से संपन्न हुए। उन्होंने टिप्पणी की, "विडंबना यह है कि भारत में चुनाव आयोग के कारण चुनावी प्रक्रिया को और अधिक जटिल बनाया जा रहा है।"तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने दोहराया कि वह बंगाल में जिस तरह से एसआईआर किया जा रहा है, उसका वह लगातार विरोध कर रही हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि आयोग पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहा है और उनकी सरकार ने बंगाल के लोगों के मताधिकार की रक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के हस्तक्षेप के बावजूद आयोग ने अपना रुख नहीं बदला है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया की समय सीमा बढ़ा दी गयी थी। इसके अनुसार, अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित होनी है। राज्य में पुनरीक्षण प्रक्रिया से संबंधित सुनवाई कुछ दिन पहले ही समाप्त हुई है। इसी पृष्ठभूमि में सुश्री बनर्जी ने चुनाव आयोग पर 'घातक खेल' खेलने का आरोप लगाया।
उन्होंने बंगाल की मसौदा मतदाता सूची से लगभग 58 लाख नामों को हटाये जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया और आरोप लगाया कि कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) आधारित प्रक्रियाओं के उपयोग के कारण कई वास्तविक मतदाताओं के नाम हटा दिये गये हैं।
इस कवायद की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि हटाये गये नामों की सूची कहां है और उन्हें किस आधार पर बाहर किया गया है? मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि इसी तरह की अनियमितताएं हरियाणा और महाराष्ट्र में भी हुई थीं और चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयों को छिपाया नहीं जा सकता।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित