बीड , अक्टूबर 24 -- महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उस विवाद में दखल देने की अपील की है जो महाराष्ट्र में एक ऑडियो क्लिप को लेकर खड़ा हो गया है।

श्री जरांगे ने आरोप लगाया है कि अगर इसमें प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कोई साजिश शामिल है तो राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

इस ऑडियो क्लिप को लेकर हुए विवाद ने भाजपा और श्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के बीच तनाव बढ़ा दिया है। इस विवाद के बीच एक भाजपा नेता के दिल्ली दौरे की खबर ने भी अटकलों को जन्म दे दिया है, जिसके चलते श्री जरांगे ने इन घटनाक्रमों पर सवाल उठाते हुए मामले की गहन जांच की मांग की है।

श्री जरांगे ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस विवाद की तह तक जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सच सामने नहीं आया, तो वह उन पर ही यह साजिश रचने का आरोप लगाएंगे। उन्होंने मांग की, "अगर श्री देवेंद्र फडणवीस ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दिल्ली से केंद्रीय जांच एजेंसियों को काम पर लगाना चाहिए।" उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच एक स्वतंत्र टीम द्वारा की जानी चाहिए, जिसमें वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी तथा न्यायाधीश शामिल हों, ताकि जांच पूरी तरह से राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रहे।

मराठा आरक्षण कार्यकर्ता ने यह आशंका भी जताई कि राजनीतिक नेता इस विवाद पर चर्चा करने के लिए दिल्ली जा सकते हैं और बाद में उनके खिलाफ एकजुट हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग पर्दे के पीछे हो रही चर्चाओं को दबाने के लिए आपस में हाथ मिला सकते हैं। श्री जरांगे ने ऑडियो क्लिप के वायरल होने का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि शिवसेना नेता रामदास कदम को यह रिकॉर्डिंग सार्वजनिक रूप से चलाने से पहले ही कैसे मिल गई। आरक्षण कार्यकर्ता के अनुसार श्री कदम के पास पूरी ऑडियो क्लिप मौजूद थी और उन्हें यह बताना चाहिए कि उन्हें यह क्लिप किसने दी।

श्री जरांगे ने मांग की, "श्री रामदास कदम को पता है कि उन्हें यह क्लिप किसने दी है। इस पहलू की भी जांच होनी चाहिए।" उन्होंने यह भी सवाल किया कि श्री कदम ने रिकॉर्डिंग का केवल वही हिस्सा क्यों चलाया, जिससे श्री शिंदे की छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी क्लिप चला दी है और रिकॉर्डिंग के चुनिंदा इस्तेमाल पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने पूछा, "श्री रामदास कदम ने केवल वही क्लिप क्यों चलाई जिससे श्री शिंदे की छवि खराब होती है? श्री एकनाथ शिंदे को खत्म करने की कोशिश कौन कर रहा है?" इस विवाद ने ऑडियो रिकॉर्डिंग और उससे जुड़े दावों को लेकर चल रहे राजनीतिक तनाव में एक नया पहलू जोड़ दिया है।

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