दीमापुर , जून 16 -- नगालैंड के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री सीएल जॉन ने मंगलवार को कहा कि राज्य मंत्रिमंडल द्वारा हाल ही में नगालैंड अगरवुड नीति, 2026 को मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य इस क्षेत्र में एक प्रमुख राज्य के रूप में उभरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने कहा कि इस नीति का उद्देश्य निजी और सामुदायिक भूमि पर अगरवुड की खेती को प्रोत्साहित करना, रोजगार के अवसर पैदा करना, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना और प्राकृतिक आवास में इस लुप्तप्राय प्रजाति का संरक्षण करना है। गौरतलब है कि अगरवुड को अगर या ऊद भी कहा जाता है। इससे बनने वाला इत्र सबसे महंगे बिकने वाले इत्र में शामिल है। इससे अगरबत्तियां, दवाईयां और सुगंधित सामान बनाये जाते हैं।
दीमापुर वन कार्यालय परिसर में अगरवुड की खेती और व्यापार पर एक जागरूकता कार्यशाला को संबोधित करते हुए, श्री जॉन ने एक स्थायी आजीविका के अवसर के रूप में अगरवुड की खेती को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। अगरवुड के अत्यधिक आर्थिक और पारिस्थितिक मूल्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा नगालैंड की अनुकूल जलवायु और भूमि की स्थिति, विशेष रूप से तलहटी वाले क्षेत्रों में, राज्य को उच्च गुणवत्ता वाले अगरवुड की खेती के लिए आदर्श बनाती है। श्री जॉन ने कहा कि कई जिलों के किसानों ने इसके उच्च बाजार मूल्य और बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मांग के कारण पहले ही अगरवुड की खेती शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा कि व्यापारी, विशेष रूप से पश्चिम एशियाई देशों के, नगालैंड सहित पूर्वोत्तर से अगरवुड उत्पादों को प्राप्त करने के लिये लगातार देख रहे हैं। असम और त्रिपुरा जैसे पड़ोसी राज्यों ने अगरवुड की खेती में महत्वपूर्ण प्रगति की है और विश्वास व्यक्त किया कि नगालैंड अब एक व्यापक नीतिगत ढांचा तैयार होने के साथ अपनी वृद्धि को तेज करने में सक्षम होगा।
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