दरभंगा , जून 15 -- अखिल भारतीय किसान सभा एवं विभिन्न जनसंगठनों के संयुक्त आह्वान पर सोमवार को दरभंगा समाहरणालय पर विशाल प्रदर्शन एवं घेराव कार्यक्रम आयोजित किया गया।प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ किसान नेता राजीव कुमार चौधरी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों, मजदूरों, नौजवानों तथा गरीब तबकों की समस्याओं की लगातार उपेक्षा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और बुनियादी जनसमस्याओं से आम जनता त्रस्त है, लेकिन सरकार जनता के हितों की अनदेखी कर बड़े पूंजीपतियों के पक्ष में नीतियां बना रही है।उन्होंने कहा कि डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और बिजली की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जबकि नौजवान रोजगार के लिए भटकने को मजबूर हैं। स्मार्ट मीटर के माध्यम से जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि भी अत्यंत अपर्याप्त है।
किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि सरकार जनता के बुनियादी सवालों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनअधिकारों और सामाजिक न्याय की रक्षा का व्यापक संघर्ष है, जिसे आने वाले दिनों में और मजबूत किया जाएगा।
वरिष्ठ किसान नेता नारायण झा ने कहा कि कृषि क्षेत्र गहरे संकट से गुजर रहा है। किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है, सिंचाई व्यवस्था बदहाल है तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समुचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों एवं ग्रामीण गरीबों से संगठित होकर संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अहमद अली तमन्ने, सुधीर साह, आनंद मोहन, चन्देश्वर प्रसाद सिंह, राम उदगार साह, राम चलित्र राम, प्रो. राम प्रवेश पासवान, भगवान लाल पासवान, चुल्हाई दास, सुधीर राय, चन्द्रकिशोर झा, राम प्रसाद महतो, राजू मिश्रा, गौतम कान्त चौधरी, सुकुमारी देवी, दीपक कुमार मिश्रा, महेन्द्र पासवान एवं कांन्ती सिंह सहित किसान सभा और विभिन्न जनसंगठनों के अनेक नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को 18 सूत्री मांगपत्र सौंपा। प्रमुख मांगों में डीजल, पेट्रोल एवं रसोई गैस की कीमतों में कमी, सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर Rs.5000 प्रतिमाह करना, किसानों की फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी, ओलावृष्टि एवं अग्निकांड से प्रभावित किसानों को मुआवजा, बंद सरकारी नलकूपों को चालू करना, मनरेगा के तहत 200 दिनों का रोजगार एवं Rs.700 दैनिक मजदूरी सुनिश्चित करना, स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर रोक लगाना, युवाओं के लिए रोजगार गारंटी कानून लागू करना तथा भूमिहीन परिवारों को पांच डिसमिल जमीन उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा जिले में बढ़ते अपराध, चोरी, डकैती, हत्या और लूट की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की भी मांग की गई।
सभा के अंत में नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन जनसमस्याओं तथा मांगों के समाधान की दिशा में शीघ्र पहल नहीं करते हैं, तो आंदोलन को और व्यापक तथा तेज किया जाएगा।
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