बारां , अक्टूबर 31 -- राजस्थान में बारां के ऐतिहासिक डोल मेला रंगमंच पर शनिवार रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में शब्द, वीरता, हास्य, व्यंग्य और भावनाओं का संगम देखने को मिला।

बड़ी संख्या में श्रोता देर रात तक कवियों की प्रस्तुतियां सुनने के लिए डटे रहे। हालांकि, लंबे समय से डोल मेले के कवि सम्मेलन का इंतजार करने वाले कुछ श्रोताओं को इस बार पहले जैसी रंगत और आनंद महसूस नहीं हुआ। इसके बावजूद विभिन्न रसों की प्रस्तुतियों ने कई मौकों पर पंडाल में तालियां और ठहाके गूंजे।

कवि सम्मेलन का संचालन इंदौर से आए अतुल ज्वाला ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अन्नू सपन की मधुर सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद नाथद्वारा के हास्य कवि सुनील व्यास ने चुटीली रचनाओं से माहौल को खुशनुमा बना दिया। उनकी प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए।

भोपाल से आईं साहिबा असर ने गजल और गीतों से काव्य संध्या में भावनात्मक रंग भरा। वहीं वीर रस के कवि अपूर्व विक्रम शाह ने जौहर की गाथा का प्रभावी काव्य पाठ करके श्रोताओं में जोश भर दिया। उनकी पंक्तियां "रणभूमि में सजाधजा कर स्वयं भेजे अपने सुहाग को, गले लगाती है छत्राणी, जौहर वाली आग को..." सुनते ही पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उत्साहित श्रोताओं ने भारत माता के जयकारे भी लगाए।

हास्य रस के चर्चित कवि दिनेश देसी घी ने करीब सवा घंटे तक हास्य, पैरोडी और व्यंग्य से श्रोताओं का मनोरंजन किया। उनकी प्रस्तुतियों पर पंडाल में लगातार ठहाके गूंजते रहे। उन्होंने हास्य के साथ सामाजिक विसंगतियों पर भी तीखे कटाक्ष किए। उनकी पंक्तियां "हम उस देश के वासी हैं, जिस देश में आदिवासी हैं, उन्होंने संस्कार नहीं छोड़ा, हमने अपनी मां को वृद्धाश्रम छोड़ा..." ने श्रोताओं को हंसाने के साथ सामाजिक चिंतन के लिए भी मजबूर किया। उनकी हास्य रचनाओं और हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुतियों को खूब सराहा गया।

सम्मेलन के अंतिम दौर में डॉ. अन्नू सपन ने गीत और गजलों की प्रस्तुतियों से माहौल को भावनाओं से भर दिया। "इतनी नफरत दिलों में न पाला करो, नहीं तो जिंदगी घुट-घुट कर मर जाएगी..." जैसी रचना पर उन्हें जमकर दाद मिली। 'गीत गणगौर' की उपाधि से सम्मानित अन्नू सपन ने अपनी लंबी काव्य पारी में श्रोताओं को बांधे रखा।

सरदार मंजीत सिंह ने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से व्यवस्था पर कटाक्ष किए। 'ठेकेदार के नक्शे पर पुल बनाया, कुछ अधिकारी कुछ नेता खा गया...' जैसी पंक्तियों ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।

मीरा दीक्षित ने श्रृंगार रस के माध्यम से कृष्ण और मीरा के प्रेम का भावपूर्ण चित्रण किया, जबकि प्रेरणा ठाकुर ने गीत और गजलों की प्रस्तुतियों से वाहवाही बटोरी।

मनुव्रत वाजपेयी, अमन अक्षर, मनोज गुर्जर, भूपेंद्र राठौर, निशामुनि गोड़, पीयूष परिंदा और शहनाज हिंदुस्तानी सहित अन्य कवियों ने भी विभिन्न रसों की रचनाएं प्रस्तुत कीं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित