जयपुर , अक्टूबर 06 -- राजस्थान सरकार कम बारिश के कारण प्रदेश में अकाल की परिस्थतियों के मद्देनजर गौशालाओं में चारे पानी की व्यवस्था के प्रति गंभीर है और चारे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले ने उनकी अध्यक्षता में गौशालाओं में गौवंश के लिए पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल एवं आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में आयोजित बैठक में यह जानकारी दी। बैठक में प्रदेश की गौशालाओं में चारे एवं पानी की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में जिलों से पशुपालन विभाग के अधिकारी तथा गौशाला संचालक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
श्री भाले ने कहा कि गौवंश के संरक्षण और संवर्द्धन के साथ उसकी समुचित देखभाल राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गौशालाओं में चारे की उपलब्धता एवं पेयजल व्यवस्था की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा जहां कहीं भी कमी सामने आए, वहां तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने चारे की उपलब्धता, भंडारण, गुणवत्ता एवं वितरण व्यवस्था पर निरंतर नजर रखते हुए गौशालाओं में पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण पानी की नियमित आपूर्ति के भी निर्देश दिए। उन्होंने चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश को भी पत्र लिखने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला स्तर पर गौशालाओं की व्यवस्थाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए और संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की रिपोर्टिंग निदेशालय पशुपालन और गोपालन को की जाए जिससे विभाग आवश्यक कार्रवाई कर आपूर्ति की सुनिश्चितता तय करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौशालाओं में व्यवस्थाओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में गौशालाओं की आवश्यकताओं के अनुसार चारा-पानी की व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग, स्थानीय स्तर पर समन्वय तथा आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित प्रबंधन की कार्ययोजना पर भी चर्चा करते हुए प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि गौशालाओं में बेहतर व्यवस्थाएं केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि गौवंश के प्रति हमारी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का दायित्व भी है। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि प्रदेश की किसी भी गौशाला में गौवंश को चारे अथवा पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़े।
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