चंडीगढ़ , अक्टूबर 31 -- अकाली दल वारिस पंजाब दे (एडीब्ल्यूपीडी) की प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने पंजाब के सभी23 जिलों की संगठनात्मक इकाइयों को भंग करने के फैसले को एकतरफा और असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया है। कमेटी ने पार्टी के कामकाज में कथित सरकारी हस्तक्षेप, आंतरिक लोकतंत्र की अनदेखी और पंथक एजेंडे से भटकने का आरोप लगाते हुए नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाए हैं।
चंडीगढ़ प्रेस क्लब में शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कमेटी के प्रवक्ता गुरदीप सिंह भंडाल ने कहा कि पार्टीकी स्थापना पंथक अस्तित्व, मीरी-पीरी के सिद्धांत, राजनीतिक स्वायत्तता और सिख स्वाभिमान के मूल्यों को लेकर की गई थी। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियां पार्टी की विचारधारा और बुनियादी सिद्धांतों के प्रति नेतृत्व की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
श्री भंडाल ने बताया कि पार्टी के अधिकांश जिला अध्यक्षों ने संगठन के कामकाज में कथित सरकारी हस्तक्षेप, पदों के आवंटन और टिकट वितरण से जुड़े मामलों को कार्यकारी अध्यक्ष बापू तरसेम सिंह के समक्ष कई बार उठाया था। इस संबंध में 20 अक्टूबर को तथ्यों और साक्ष्यों के साथ छह पन्नों का एक पत्र सौंपा गया था। इसमें पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पार्टी को बाहरी प्रभाव से मुक्त रखने की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद श्री फतेहगढ़ साहिब में बैठक और गुरुद्वारा श्री ज्योति स्वरूप साहिब में अरदास के बाद प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन किया गया। कमेटी ने बापू तरसेम सिंह, पांच प्रधानों के प्रतिनिधियों और जिला अध्यक्षों के साथ करीब पांच घंटे तक बैठक की और तथ्यों तथा साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
श्री भंडाल के मुताबिक, बापू तरसेम सिंह ने मामले की जांच के लिए तीन दिन का समय मांगा था, लेकिन इसके 24 घंटे के भीतर ही प्रदेश के सभी 23 जिलों का संगठनात्मक ढांचा भंग कर दिया गया। साथ ही ड्राफ्टिंग कमेटी के पांच सदस्यों की प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी गई।
कमेटी ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति या पदाधिकारी को अपने स्तर पर इस तरह का फैसला लेने का अधिकार नहीं है। कमेटी ने सरदार तेजिंदर सिंह ढिल्लों का इस्तीफा भी उनके द्वारा उठाई गई आपत्तियों और विचारों पर विचार करने के बाद नामंजूर कर दिया तथा उन्हें पहले सौंपी गई जिम्मेदारी निभाते रहने को कहा।
श्री भंडाल ने कहा कि अकाली दल वारिस पंजाब दे किसी व्यक्ति या परिवार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि पंथ और पंजाब के लोगों की अमानत है। उन्होंने पार्टी को मजबूत करने और भाई अमृतपाल सिंह खालसा को संसद सदस्य बनाने में जिला अध्यक्षों और उनकी टीमों की भूमिका की सराहना की।
कमेटी ने देश-विदेश में रहने वाली संगतों और पंथक संगठनों से पार्टी के मूल सिद्धांतों तथा आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की।
कमेटी ने स्पष्ट किया कि उसका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि पार्टी के पंथक सिद्धांतों, संगठनात्मक पारदर्शिता, आंतरिक लोकतंत्र और स्वतंत्र अस्तित्व को कायम रखने के लिए है।
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