फतेहगढ़ साहिब , सितंबर 15 -- शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मंगलवार को दावा किया कि पंजाब में अकाली दल के पक्ष में राजनीतिक तूफान उठ चुका है, जो सिख पंथ को कमजोर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों से हाथ मिलाने वाले तत्वों और दिल्ली की सभी पार्टियों को उड़ा ले जाएगा।

पार्टी के 'पंजाब बचाओ' अभियान के तहत यहां आयोजित रैली को संबोधित करते हुए श्री बादल ने लोगों से अपील की कि वे पहचानें कि कौन-सी पार्टी पंजाब की अपनी क्षेत्रीय पार्टी है और कौन दिल्ली के राजनीतिक हितों के लिए काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व अकाली दल को कमजोर करने के लिए एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और ऐसे लोग पंजाब तथा पंथ के हितों की रक्षा नहीं कर सकते।

वारिस पंजाब दे संगठन का नाम लेते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस संगठन का एकमात्र उद्देश्य अकाली दल को हराना है और संगठन ने खुद सार्वजनिक रूप से यह बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि ऐसा संगठन पंजाब या पंथ के लिए सकारात्मक भूमिका नहीं निभा सकता।

श्री बादल ने कहा कि अकाली दल विकास, शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध है तथा गुरु साहिबान द्वारा दिए गए 'सरबत का भला' के सिद्धांत पर चलता है। उन्होंने दावा किया कि समावेशी शासन का यह मॉडल विभाजनकारी ताकतों को पसंद नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी कारण उन पर दो बार हमला किया गया। उन्होंने कहा, ''हमारे सिर कट सकते हैं लेकिन हम अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेंगे।''अकाली दल अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि पंजाब ने उनसे खराब मुख्यमंत्री नहीं देखा। उन्होंने मुख्यमंत्री पर गुरु साहिबान के प्रति कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार करने तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। श्री बादल ने दावा किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और तबादलों तथा तैनातियों में कथित रूप से पैसे लिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे लोगों को भी राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने अपने भाषण में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

श्री बादल ने बेअदबी के मुद्दे पर भी आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि पंजाब की राजनीति में आप के आने के बाद वर्ष 2015 से बेअदबी की घटनाओं का सिलसिला शुरू हुआ और बाद में आप के एक विधायक नरेश यादव को मलेरकोटला में बेअदबी के एक मामले में दोषी ठहराया गया। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में किसी अकाली नेता या कार्यकर्ता के खिलाफ बेअदबी के मामले में कार्रवाई नहीं हुई, जबकि कांग्रेस और आप सरकारों ने इस मुद्दे पर राजनीति की। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार भ्रष्टाचार, मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन या अन्य गंभीर मुद्दों पर घिरती है तो बेअदबी का मुद्दा उठाकर जनता का ध्यान भटकाया जाता है।

उन्होंने पंजाब में जारी बिजली कटौती को लेकर मुख्यमंत्री को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लंबे समय से जारी बिजली संकट से किसान, घरेलू उपभोक्ता और उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पिछले करीब दो सप्ताह से बिजली की कमी को पूरा करने के लिए आवश्यक प्रबंध करने में विफल रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस दावे पर भी सवाल उठाया कि किसानों को 10 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति दी जा रही है। श्री बादल ने कहा कि अगर ऐसा है तो वर्तमान बिजली संकट में यह आपूर्ति कहां चली गई। उन्होंने गुलजार सिंह की आत्महत्या को कथित रूप से मामूली घटना बताने के लिए भी मुख्यमंत्री की आलोचना की।

शिअद अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी पंजाब की क्षेत्रीय पार्टी है और उसे पंजाबी तथा सिख समुदाय के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पंजाब को दोबारा पटरी पर लाने के लिए कार्ययोजना तैयार की है और लोगों से अपनी क्षेत्रीय पार्टी को मजबूत करने तथा दिल्ली की पार्टियों को नकारने की अपील की। उन्होंने सत्ता में लौटने पर हर उस किसान को तत्काल ट्यूबवेल कनेक्शन देने का वादा किया, जिसके पास अभी कनेक्शन नहीं है। उन्होंने 'आटा-दाल' योजना के तहत लाभार्थियों को 50 किलोग्राम गेहूं देने, शगुन योजना की राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये तथा वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाकर 3,100 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की। उन्होंने प्रत्येक जिला मुख्यालय में मेडिकल और पशु चिकित्सा कॉलेज स्थापित करने तथा युवा उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण देने की बात कही। उन्होंने पशुपालन फार्म परियोजनाओं के लिए 75 प्रतिशत सब्सिडी देने का भी वादा किया।

रैली में हलका प्रभारी बलजीत सिंह भुट्टा, डॉ. दलजीत सिंह चीमा, दरबारा सिंह गुरु, गुरप्रीत सिंह राजूखन्ना, सरबजीत सिंह झिंझर, शरणजीत सिंह चनारथल, सुरजीत सिंह गढ़ी, अधिवक्ता एएस धरनी, तेजिंदर सिंह मिड्डूखेड़ा, अर्शदीप सिंह क्लेर और मनमोहन सिंह मकारोपुर समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

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