चेन्नई , जुलाई 28 -- राज्यसभा सांसद अंबुमणि बुधवार को यहां आयोजित सामान्य परिषद की बैठक में पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) का सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

पार्टी संस्थापक डॉ. एस. रामदास के चार दिन पहले अपने 88वें जन्मदिन पर अपने बेटे को पार्टी की कमान सौंपने और राजनीति में हस्तक्षेप न करने का फैसला लेने के बाद मामल्लापुरम में आयोजित बैठक में इस संबंध में एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।

पिछले साल पिता-पुत्र के बीच मतभेद के बाद श्री अंबुमणि के नेतृत्व वाले गुट ने सामान्य परिषद की बैठक बुलाकर उन्हें पार्टी अध्यक्ष के रूप में एक वर्ष का अतिरिक्त कार्यकाल दे दिया था।

चूंकि उनका कार्यकाल एक अगस्त को समाप्त हो रहा है, श्री अंबुमणि ने आज के लिए सामान्य परिषद की बैठक बुलायी और पार्टी पर पूरा नियंत्रण हासिल करते हुए अन्य पदाधिकारियों के साथ फिर से अध्यक्ष चुने गये।

यह बैठक पीएमके के दोनों गुटों के बीच हाल ही में हुए समझौते के बाद बुलाई गई, जिससे करीब 18 महीने पुराना विवाद खत्म हो गया। लंबे समय से चले आ रहे इस मतभेद के खत्म होने के संकेत 24 जून को मिले थे, जब अपनी शादी की 61वीं सालगिरह पर अंबुमणि अपने पिता का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इस दौरान उनके पिता ने उन्हें भावुक होकर गले लगाया, जिससे साफ हो गया कि दोनों ने अपने मतभेद भुला दियेयेहैं।

दोनों के पुनर्मिलन के कुछ दिनों बाद श्री रामदास ने अपने 88वें जन्मदिन के अवसर पर राजनीति से अपने संन्यास की घोषणा की और श्री अंबुमणि को पार्टी की बागडोर सौंप दी, जिससे पार्टी में सत्ता का एक प्रमुख हस्तांतरण हुआ।

सामान्य परिषद की बैठक में 30 से अधिक प्रस्ताव पारित किये गये। इनमें तमिलनाडु में पूर्ण शराबबंदी लागू करने, नीट परीक्षा को खत्म करने और कर्नाटक के मेकेदातु बांध प्रस्ताव को मंजूरी देने पर केंद्र सरकार की आलोचना करने की मांग शामिल थी।

बैठक में तमिलनाडु सरकार से इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और विवाद के समाधान के लिए अलग अधिकरण बनाने की योजना छोड़ने की भी मांग की गयी।

अन्य प्रस्तावों में किसानों के कृषि ऋण और भूमि कर को पूरी तरह से माफ करना, शिक्षा को समवर्ती सूची से वापस राज्य सूची में लाकर राज्य के साथ 58 साल से हो रहे अन्याय को समाप्त करना, तमिलनाडु को सूखाग्रस्त राज्य घोषित करना और सूखे के कारण कुरुवई की फसल न बो पाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 10,000 रुपये का मुआवजा देना शामिल है। इसके अलावा प्रति क्विंटल चावल के लिए 3,500 रुपये और प्रति टन गन्ने के लिए 5,000 रुपये खरीद मूल्य घोषित करने, नशे के खतरे को खत्म करने, सिंगापेन स्पेशल फोर्स को मजबूत करके महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और केंद्र सरकार द्वारा रोहिणी आयोग की सिफारिशों को जारी कर केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में ओबीसी के लिए आंतरिक आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग की गयी।

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