चेन्नई , अक्टूबर 19 -- पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अंबुमणि रामदास ने आशंका जताई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण चेन्नई में बादल फटने की घटनाएं बार-बार हो सकती हैं। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ तिरुपुगझ की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
शनिवार रात हुई अत्यधिक भारी बारिश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों में कम समय के भीतर 30 सेंटीमीटर से अधिक, जबकि कई अन्य स्थानों पर 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। उन्होंने चेन्नई में बाढ़ की रोकथाम के उपायों और वर्षा जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री रामदास ने कहा कि पार्टी को पांच साल से ज़्यादा समय से चेतावनी दे रही है कि जलवायु परिवर्तन से चेन्नई में बादल फटने जैसे हालात हो सकते हैं और उनसे निपटने के लिए शहर में बाढ़ रोकने और बारिश के पानी की निकासी के बुनियादी ढांचे को मज़बूत किया जाना चाहिए। गत 17 अक्टूबर की रात को हुई अतिवृष्टि ने इस चेतावनी को और पक्का कर दिया है।
उन्होंने एक बयान में कहा कि इस साल अल नीनो के असर से हालात और खराब होने का भी खतरा है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार को बाढ़ से निपटने के उपाय तेज़ करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभूतपूर्व बारिश के कारण चेन्नई के कई हिस्सों में जलभराव हो गया है। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले दिनों में चेन्नई में कल हुई बारिश से भी अधिक भारी वर्षा हो सकती है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के लिए खतरा बन रहा जलवायु परिवर्तन ऐसे प्रभाव पैदा कर सकता है, जिनकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।
चेन्नई में बाढ़ रोकने के लिए तमिलनाडु सरकार को दी गई सिफारिशों में तिरुपुगझ की अगुवाई वाली समिति की सिफारिशें खास तौर पर ज़रूरी हैं। नवंबर 2021 में बनी इस समिति ने मार्च 2023 तक कुल 17 महीनों तक अलग-अलग क्षेत्र अध्ययन किया और उनसे इकट्ठा किए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया और फिर मार्च 2023 में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी। हालांकि 43 महीने बाद भी रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। पिछली द्रमुक सरकार ने कहा था कि तिरुपुगझ समिति की रिपोर्ट में कुल 161 सिफारिशें थीं और उनमें से 101 को लागू किया जा रहा था।
पूर्व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि ने हालांक कहा कि किसी को नहीं पता कि वे 161 सिफारिशें क्या थीं या कौन सी 101 सिफारिशें असल में लागू की गई थीं। द्रमुक के बाद टीवीके सरकार आने के बाद भी यही हालत बनी हुई है। चेन्नई को एक बार फिर बाढ़ में डूबने नहीं देना चाहिए। चेन्नई में बादल फटने जैसी बारिश की बढ़ती संभावना और भविष्य में भारी बारिश के लिए तैयारी की ज़रूरत को देखते हुए, सरकार को सभी ज़रूरी एहतियाती कदम उठाने चाहिए।
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