हनुमानगढ़ , मार्च 15 -- हरियाणा के अंबाला जिले में बारारा-दोसड़का रोड पर करीब दो किलोग्राम आरडीएक्स, आईईडी , डेटोनेटर और बैटरी की बरामदगी का मामला अब राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले से जुड़ता नजर आ रहा है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच में खुलासा हुआ है कि पकड़े गए तीन युवकों का संबंध हनुमानगढ़ से है, जहां पाकिस्तान में बैठे आतंकी शहजाद भट्टी के निर्देश पर पहले बम विस्फोट की योजना बनाई गई थी। इस जानकारी के आधार पर हनुमानगढ़ जिला पुलिस ने अपनी एक टीम को अंबाला भेजा है, जो आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

हनुमानगढ़ के पुलिस अधीक्षक हरिशंकर ने आज इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि गत 28 फरवरी से तीन मार्च के बीच हनुमानगढ़ जिले में इस मामले का गहरा संबंध होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने कहा-हमारी टीम अंबाला में पहुंच चुकी है और पूछताछ के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी युवक हनुमानगढ़ में कहां ठहरे थे और किस-किस के संपर्क में थे। पकड़े गए तीन युवकों में से एक राजस्थान के अजमेर जिले का निवासी है, जो इस मामले को राज्य स्तर पर और गंभीर बनाता है।

उल्लेखनीय है कि उक्त अवधि के दौरान हनुमानगढ़ टाउन थाना क्षेत्र में पंजाब के कुख्यात बंबीहा गिरोह के दो सदस्यों को बस से उतरकर भागते हुए गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से 11 पिस्तौल, मैगजीन और अन्य अवैध हथियार बरामद हुए थे। पुलिस ने इस मामले में बंबीहा गिरोह के लिए हथियार आपूर्ति करने के शक में एक और बदमाश विशाल उर्फ भैइया को शनिवार को हिरासत में लिया है, जो पहले पंजाब की जेल में बंद था। जांच एजेंसियां अब इन घटनाओं को आपस में जोड़कर देख रही हैं, क्योंकि हनुमानगढ़ पंजाब सीमा से सटा हुआ जिला है, जहां तस्करी गतिविधियों के पुराने मार्ग मौजूद हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी के इशारे पर पहली योजना हनुमानगढ़ में बम विस्फोट करने की थी। आईईडी को हनुमानगढ़ के किसी अज्ञात स्थान पर पहुंचा भी दिया गया था, लेकिन आरडीएक्स की आपूर्ति में देरी हो गई। इसी कारण चार दिन बाद आईईडी को वापस मंगाना पड़ा और योजना को टाल दिया गया।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह महज तकनीकी विफलता नहीं थी, बल्कि एक रणनीतिक बदलाव का हिस्सा थी। हनुमानगढ़ जैसे सीमावर्ती, अपेक्षाकृत शांत जिले में विस्फोट का उद्देश्य दहशत फैलाना, सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाना और यह संदेश देना था कि आतंकी नेटवर्क केवल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं हैं। ऐसे क्षेत्र में हमला होने से न केवल स्थानीय स्तर पर भय पैदा होता, बल्कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो जाते।

यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने हनुमानगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ के कई संवेदनशील स्थानों की रेकी की थी। उन्होंने इन स्थानों के वीडियो बनाकर व्हाट्सऐप के जरिए पाकिस्तान भेजे, ताकि अंतिम लक्ष्य तय किया जा सके। जब हनुमानगढ़ की योजना विफल हो गयी, तो साजिश का केंद्र अंबाला की ओर मोड़ दिया गया। यहां धार्मिक स्थलों, राजनीतिक व्यक्तियों और सैन्य ठिकानों को संभावित लक्ष्य के रूप में चुना गया था।

अंबाला कैंट की ओर जाते समय स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने समय रहते तीनों आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े जाने के वक्त आईईडी पूरी तरह सक्रिय था और प्रेशर रिलीज स्विच से जुड़ा हुआ था, जिससे जरा सी चूक भी भारी तबाही में बदल सकती थी। बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुंचकर टिफिन में फिट इस बम को निष्क्रिय किया। पुलिस ने आरोपियों से चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनमें पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से संपर्क के पुख्ता सबूत मिले हैं।

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