नयी दिल्ली , जुलाई 20 -- देश में अंतरिक्ष विभाग का बजट पिछले पांच वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद के 0.05 प्रतिशत से 0.03 प्रतिशत के बीच रहा है।

विभाग के बजट का ज्यादा हिस्सा प्रक्षेपण यानों , पृथ्वी का अवलोकन करने वाले उपग्रहों ,निदेशन प्रणाली, नयी प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन करने वाले उपग्रहों और सुविधाओं के निर्माण पर खर्च होता रहा है। यह जानकारी गुरुवार को प्रधानमंत्री कार्यालय और परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

मंत्री द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार2025-26 में अंतरिक्ष विभाग का बजट 13416.20 करोड़ रुपये रहा जो जीडीपी का 0.03 प्रतिशत और केंद्र के कुल बजट का 0.26 प्रतिशत था। वर्ष 2024-25 में विभाग को 13042.75 करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे जो जीडीपी का 0.04 प्रतिशत और बजट का 0.27 प्रतिशत, 2023-24 में 12543.91 करोड़ रुपये ( बजट का 0.28 प्रतिशत ( जीडीपी का 0.04 प्रतिशत, 2022-23 में 13700 रुपये (बजट का 0.35 प्रतिशत, जीडीपी का 0.04 प्रतिशित) तथा 2021-22 में विभाग का बजट 13949.09 रुपये (आम बजट के 0.40 प्रतिशत और जीडीपी के 0.05 प्रतिशत के बराबर) था।

प्रक्षेपण यानों , पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों (ईओ उपग्रह),निदेशन उपग्रहों, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उपग्रहों के निर्माण तथा संबंधित अवसंरचना एवं सुविधाओं के सृजन पर 2021-22 में 8,873.62 करोड़ रुपये,2022-23 में 7,646.72 करोड़ रुपये, 2023-24 में 8,083.43 करोड़ रुपये, 2024-25 में 8,840.72 करोड़ रुपये तथा 2025-26 (संशोधित अनुमान ) 9,601.98 करोड़ रुपये, 2026-27 (बजट अनुमान ) और10,397.06 करोड़ रुपये व्यय हुआ या उसका प्रावधान किया गया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित