उज्जैन , अप्रैल 04 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की अंतरिक्ष उपलब्धियां और सफलताएं भारत की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री उज्जैन जिले के डोंगला स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम" के दूसरे दिन "भारत में खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान का वर्तमान और भविष्य" विषयक सत्र में सहभागिता कर रहे थे।
उन्होंने वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत जानकारियों को रोचक बताते हुए चंद्रयान-3 जैसी उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार की सफलताएं युवाओं को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
सत्र में फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता की जानकारी देते हुए बताया कि विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि रही। इसके साथ भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बना और दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में पहुंचने वाला पहला देश बना।
उन्होंने बताया कि प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर महत्वपूर्ण अध्ययन किए और लैंडिंग स्थल को "शिव शक्ति पॉइंट" नाम दिया गया। साथ ही चंद्रयान-4, चंद्रयान-5 (लूपेक्स), वीनस ऑर्बिटर मिशन और मंगल लैंडर मिशन जैसी भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
वहीं विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी के निदेशक डॉ. तरुण पंत ने आयनोस्फियर और ऊपरी वायुमंडल की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अंतरिक्ष गतिविधियों का पृथ्वी के वातावरण और जलवायु पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। सम्मेलन के दौरान "खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी में प्रगति" और "विकसित भारत के लिए स्पेस इकोनॉमी" विषयों पर भी विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
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