खैरागढ़-छुईखदान-गंडाई , जुलाई 21 -- छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के खैरागढ़ में अंतरजातीय विवाह करने वाले एक अधिवक्ता दम्पति ने समाज के कुछ कथित पदाधिकारियों पर सामाजिक बहिष्कार, 35 हजार रुपये की अवैध वसूली, जबरन सामूहिक भोज कराने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

मंगलवार को पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए आवेदन में अधिवक्ता नेमीचंद वर्मा ने कहा है कि उन्होंने सितंबर 2025 में अपनी इच्छा से प्रमिला सोनकर से विधिसम्मत विवाह किया था। विवाह के बाद खैरागढ़ विकासखंड के ग्राम देवरी में समाज की बैठक आयोजित की गई, जिसमें कथित तौर पर अंतरजातीय विवाह का हवाला देते हुए उनके परिवार पर 35 हजार रुपये का सामाजिक जुर्माना लगाया गया।

आवेदन के अनुसार, उस समय परिवार के पास निर्धारित राशि नहीं थी लेकिन बाद में सामाजिक दबाव के चलते 35 हजार रुपये जमा कर दिए गए। इसके बावजूद उनसे पूरे समाज के लिए सामूहिक भोज कराने तथा समाज की आराध्य वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना करने के लिए भी कहा गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह सब करने के बावजूद भी उन्हें और उनकी पत्नी को समाज में दोबारा शामिल नहीं किया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समाज के लोगों को निर्देश दिया गया कि कोई भी व्यक्ति उनसे संबंध न रखे, उनके घर न जाए, उन्हें विवाह, धार्मिक कार्यक्रम, सामाजिक बैठकों अथवा अन्य आयोजनों में न बुलाया जाए तथा उनके परिवार का कोई कार्य भी न किया जाए। दम्पति का कहना है कि इसके कारण उन्हें लंबे समय से सामाजिक अपमान, मानसिक तनाव और अलगाव का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायतकर्ता वर्मा ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि उनके पास एक ऑडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, जिसमें समाज के एक सदस्य के साथ हुई बातचीत के दौरान सामाजिक बहिष्कार, 35 हजार रुपये की वसूली तथा समाज के निर्णय का उल्लेख है। उन्होंने जांच के लिए संबंधित मोबाइल और ऑडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की सहमति भी दी है।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि उन्होंने गांव के प्रमुख हुकुम वर्मा से हस्तक्षेप का अनुरोध किया था। शिकायत के अनुसार, उन्हें बताया गया कि गांव में पहले भी कई लोगों के साथ इसी प्रकार की घटनाएं हुई हैं, जिनमें समाज के नाम पर जुर्माना वसूला गया और सामाजिक बहिष्कार किया गया। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर गांव में समाज के नाम पर ऐसी समानांतर व्यवस्था आगे भी जारी रह सकती है।

दम्पति ने शिकायत में सुकरीत वर्मा, कोदू वर्मा, समय लाल वर्मा, जैत वर्मा और चंद्रबहादुर वर्मा को आरोपी बनाया है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने, ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच कराने, कथित रूप से वसूले गए 35 हजार रुपये वापस दिलाने तथा समाज के नाम पर सामाजिक दंड की व्यवस्था की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

बहरहाल यह पूरा मामला पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायत आवेदन पर आधारित है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का मानना है कि मामले की वास्तविक स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित