मछलीपट्टनम , जुलाई 31 -- आंध्र प्रदेश में विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने जिला चयन समिति ''मेगा सीएससी-2025'' शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच और मुख्यमंत्री चन्द्र बाबू नायडू के बेटे एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे की मांग की है।
वाईएसआरसीपी के कृष्णा ज़िला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री पेर्नी वेंकटरमैया नानी ने शुक्रवार को इस संबंध में संयुक्त कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने राज्य के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के तत्काल इस्तीफे की भी मांग की और कहा कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए वे नैतिक रूप से ज़िम्मेदार हैं।
श्री नानी के साथ निर्वाचन क्षेत्र के प्रभारी सिम्हाद्री रमेश बाबू, उप्पाला रामू, देवभक्तुनी चक्रवर्ती और पार्टी की छात्र शाखा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविचंद्र भी मौजूद थे। उन्होंने बाद में मीडिया से कहा कि सरकार ने सीएससी अधिसूचना से ठीक पहले सरकारी आदेश नंबर 74 और 75 को रद्द करके और सरकारी आदेश नंबर चार और 47 लाकर लंबे समय से चली आ रही खेल कोटा भर्ती प्रणाली को खत्म कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन आदेशों ने खेल कोटा नियुक्तियों के लिए डिग्री, टेट योग्यता और सीएससी परीक्षा की अनिवार्य शर्तों को हटा दिया, जिससे बड़े पैमाने पर अवैध एवं अनियमित भर्ती का रास्ता खुल गया। उन्होंने कहा कि शिक्षक पद पाने के लिए केवल भागीदारी प्रमाण पत्र ही काफी हो गए और खेल कोटा के तहत 380 से ज़्यादा नियुक्तियां की गयी। उनके अनुसार ये प्रमाण पत्र जारी करने वाले कई खेल संघों के प्रमुख सत्ताधारी गठबंधन के सांसद, विधायक और लोकेश के करीबी नेता हैं और जूडो व सॉफ्टबॉल जैसे संघों से असामान्य रूप से बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र जारी किये गये हैं। श्री नानी ने अफ़सोस जताया कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले असली खिलाड़ियों को न्याय नहीं मिला, जबकि केवल भागीदारी प्रमाण पत्र रखने वाले उम्मीदवारों को नौकरी मिल गयी। उन्होंने आगे सवाल किया कि अनुभवी शिक्षकों को करियर में आगे बढ़ने के लिए टेट पास करना ज़रूरी क्यों है, जबकि खेल कोटा के तहत नियुक्त सैकड़ों लोगों को टेट और सीएससी परीक्षा दोनों से छूट दे दी गयी।
पूर्व मंत्री ने सरकारी आदेश नंबर चार और 47 के तहत की गयी सभी नियुक्तियों को रद्द करने और उनकी समीक्षा करने की मांग करते हुए भर्ती प्रक्रिया की व्यापक सीबीआई जांच की मांग की और दोहराया कि श्री नारा लोकेश को "शिक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को नष्ट करने और बेरोज़गार युवाओं के साथ धोखा करने" के लिए इस्तीफ़ा देना चाहिए।
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