नई दिल्ली, अप्रैल 24 -- जीवन की आपाधापी में कई बार ऐसे पल आते हैं, जब इंसान अपना सबकुछ झोंक देने के बाद भी खाली हाथ रह जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हो, करियर में प्रमोशन की बात हो या किसी नए व्यवसाय की शुरुआत, जब परिणाम उम्मीद के उलट आते हैं, तो मन में हताशा का भाव पैदा होना स्वाभाविक है। ऐसे समय में महाभारत काल के महान कूटनीतिज्ञ और ज्ञानी महात्मा विदुर के विचार आज भी एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। विदुर नीति हमें सिखाती है कि असफलता केवल एक ठहराव है, अंत नहीं।कर्म जरूर देगा फल विदुर नीति का सबसे आधारभूत सिद्धांत कर्म की प्रधानता है। महात्मा विदुर के अनुसार, जो व्यक्ति केवल परिणाम को ध्यान में रखकर काम करता है, वह सफलता मिलने पर अहंकारी और असफल होने पर अवसादग्रस्त हो जाता है। सच्चा कर्मयोगी वह है, जो अपनी पूरी ऊर्जा प्रक्र...
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