नई दिल्ली, मई 15 -- वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस साल 16 मई 2026, शनिवार को यह पावन व्रत रखा जाएगा। सुहागिन महिलाएं इस दिन सोलह शृंगार कर पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। वट वृक्ष की पूजा और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना इस व्रत का महत्वपूर्ण अंग है। लेकिन व्रत का पूरा फल तभी मिलता है, जब कुछ जरूरी नियमों का पालन किया जाए।1. नकारात्मक विचारों से बचें वट सावित्री व्रत के दिन मन में लालच, क्रोध, ईर्ष्या या नकारात्मक विचार बिल्कुल नहीं लाने चाहिए। ऐसा करने से व्रत की पवित्रता भंग होती है और इसका फल अधूरा रह जाता है। पूरे दिन सकारात्मक और शांत रहने की कोशिश करें।2. बाल या नाखून ना काटें व्रत के दिन गलती से भी बाल या नाखून नहीं काटने चाहिए। शास्त्रों में व्रत और शुभ अवस...