वाराणसी, अक्टूबर 24 -- Varanasi News: चौबेपुर, संवाद। सोनबरसा गांव में शनिवार को श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन अयोध्या के संत दासजी महाराज ने कुंती-भीष्म स्तुति और परीक्षित जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कहा कि भगवान की शरण में आना जीवन का सच्चा संबल है। व्यक्ति को हर परिस्थिति में प्रभु का स्मरण करना चाहिए। संत दासजी महाराज ने कहा कि अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित की रक्षा श्रीकृष्ण ने की थी। कुंती स्तुति का वर्णन करते हुए कहा कि विपत्ति में भी प्रभु स्मरण बना रहता है। शर-शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह की स्तुति और देह त्याग का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। राजा परीक्षित की मृत्यु और शुकदेव के आगमन का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सांसारिक मोह से ऊपर उठकर मन हरि संकीर्...