वाराणसी, अक्टूबर 20 -- राम-रावण युद्ध का मंचन Varanasi News: रामनगर, संवाददाता। रावण था तो महापराक्रमी। उसने अपनी भुजाओं के बल पर तीनों लोक को जीता था। तभी तो जब राम की वानरी सेना का उससे सामना हुआ तो वानर-भालू ही नहीं, देवता भी भाग खड़े हुए। कई बार उसके सिर और भुजाएं कटीं, फिर जुड़ गईं। उसका पराक्रम देख सीता को त्रिजटा से पूछना पड़ा कि आखिर रावण मरेगा तो कैसे मरेगा। रामलीला के 25 वें दिन राम-रावण युद्ध के प्रसंग सजीव हुए। रणभूमि से आने के बाद रावण महल में यज्ञ करने लगा। विभीषण राम को इसकी सूचना देते हुए कहते हैं कि अगर उसका यज्ञ पूरा हो गया तो वह नहीं मरेगा। श्रीराम के आदेश पर हनुमान और अंगद वानरों के साथ जाकर रावण का ध्यान भंग कर देते हैं। रावण माया रचता है। श्रीराम अपने बाणों से उसकी माया काट देते हैं। राम के उपदेश का रावण उपहास करता है। ...