वाराणसी, अगस्त 11 -- Varanasi News: वाराणसी। सावनी फुहार और गंगा की लहरों की हलचल के बीच अस्सी घाट पर सोमवार को कजरी की बयार बही। आनंद कानन कला गुरुकुल के प्रशिक्षियों ने लोक और शास्त्रीय अंदाज में कजरियों से श्रोतावृंद को आनंदित किया। सुबह-ए-बनारस की ओर से वीडीए के संरक्षण में संचालित गुरुकुल के कला गुरु पं. विजय कपूर से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विभिन्न आयुवर्ग के प्रशिक्षियों ने उत्तर भारतीय लोकगायन शैली को शास्त्रीय साज-शृंगार के साथ प्रस्तुत कर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी। उत्सव की शुरुआत मिर्जापुरी कजरी से हुई। 'बीरन भइया अइहैं अनवइया नइहरे ना जइबो ननदी...' के बाद बनारसी, गोरखपुरी, आजमगढ़ी कजरी की बानगी पेश की गई। प्रशिक्षु मंडली ने 'हे मैया झूले चनन' और 'जय जय बोलो शेरावाली' जैसी भक्तिपूर्ण रचनाओं का सरस गायन किया। इन प्रस्तुतियों के ...