वाराणसी, अगस्त 7 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। दुनिया में जितने कर्म और ज्ञान के मार्ग हैं, सबमें कर्ता, कर्म और कर्मफल के रूप में भगवान ही हैं। यदि मनुष्य अपने को कर्ता न मानकर इसी भाव में कर्म करते रहे तो उसे अवश्य सफलता प्राप्त होती है। हर स्थिति में उसका मंगल होता है। ये बातें भागवताचार्य पं.आनंद बिहारी शास्त्री ने कहीं।

श्रीमद्भागवत महापुराण कथा वह वैदिक एजुकेशनल रिसर्च सोसाइटी की ओर से तारानगर कॉलोनी स्थित वेद मंदिर में गुरुवार को श्रीमद्भागवत महापुराण कथा कह रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि श्रीमद्भागवत को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य देह मान कर व्याख्या की जाए तो तृतीय और चतुर्थ स्कंध भगवान श्रीकृष्ण के शब्द विग्रह का जंघा कहा गया है। इसके श्रवण मनन से जीवन में कर्मठता आती है। सभी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होते हैं।

कर्मकांड ...