वाराणसी, अक्टूबर 9 -- फर्जी शासनादेश पर पदोन्नति और सेवा विस्तार का दावा खारिज Varanasi News: प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में निदेशक (प्रकाशन) पद और उसकी सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े मामले में स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी या फर्जी दस्तावेज पर कानूनी अधिकार नहीं मिल सकता है। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत डॉ. पद्माकर मिश्र को निदेशक (प्रकाशन) पद पर 62 वर्ष की आयु तक काम करने की अनुमति दी गई थी। खंडपीठ ने विश्वविद्यालय की विशेष अपील स्वीकार करते हुए पदधारक की अर्जी खारिज कर दी। बता दें कि डॉ. पद्माकर मिश्र 18 सितंबर, 1998 को विश्वविद्यालय में विक्रय अधिकारी पद पर नियुक्त हुए थे। बाद में 31 दिसंबर, 2003 क...