वाराणसी, सितम्बर 8 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। हमें कोई भी विद्या सीखनी हो तो उसका अभ्यास एक अनिवार्य शर्त है। बिना अभ्यास किसी भी विधा में पारंगत नहीं हुआ जा सकता। जहां तक संगीत की बात है तो इनमें अभ्यास का सिलसिला आदि से अंत तक चलता रहता है। साधक जितना अभ्यास करेगा वह उतना ही परिपक्व होता जाएगा। ये बातें उप्र.संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री डॉ.राजेश्वर आचार्य ने कहीं। वह सोमवार को बीएचयू के महिला महाविद्यालय में आरंभ हुई कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि थे।

कार्यशाला का उद्देश्य डॉ. आचार्य ने कहा कि संगीत की बारीकियों को सीखने के लिए अभ्यास से उत्तम गुरु कोई और हो ही नहीं सकता। संगीत साधक तब तक परिपक्व नहीं होता जब तक वह गायन और वादन विधा की सभी बारीकियों को सीख न ले। संगीत सीखने के लिए किसी कक्षा म...